ओबुलपुरम खनन घोटाला मामला: उच्चतम न्यायालय ने आईएएस अधिकारी की आरोपमुक्ति याचिका खारिज की

ओबुलपुरम खनन घोटाला मामला: उच्चतम न्यायालय ने आईएएस अधिकारी की आरोपमुक्ति याचिका खारिज की

ओबुलपुरम खनन घोटाला मामला: उच्चतम न्यायालय ने आईएएस अधिकारी की आरोपमुक्ति याचिका खारिज की
Modified Date: February 17, 2026 / 06:44 pm IST
Published Date: February 17, 2026 6:44 pm IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ‘ओबुलपुरम माइनिंग कंपनी’ (ओएमसी) से संबंधित करोड़ों रुपये के ‘घोटाला’ मामले में एक आईएएस अधिकारी की आरोपमुक्ति याचिका खारिज कर दी और मुकदमा चलाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वाई श्रीलक्ष्मी को आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया गया था।

पिछले साल 29 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने आईएस अधिकारी के खिलाफ मुकदमे पर रोक लगा दी थी और उनकी याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया था।

आंध्र प्रदेश में 2006 से 2009 के बीच उद्योग एवं वाणिज्य सचिव रहीं श्रीलक्ष्मी का नाम कथित घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर पूरक आरोपपत्र में शामिल किया गया था।

श्रीलक्ष्मी ने निचली अदालत में याचिका दायर कर खुद को आरोपमुक्त करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ केवल संदेह है और कोई ठोस आरोप नहीं हैं, जो आरोप तय करने को उचित ठहराते हों।

याचिका हालांकि 2022 में खारिज कर दी गई।

इसके बाद उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय में अपील की, जिसने उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया और 8 नवंबर, 2022 को उन्हें आरोपमुक्त कर दिया।

सीबीआई ने इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी, जिसने 7 मई, 2023 को उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को तर्कसंगत निर्णय के लिए वापस भेज दिया।

पुनर्विचार के बाद, उच्च न्यायालय ने 25 जुलाई को श्रीलक्ष्मी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और उनके खिलाफ मुकदमे को फिर से शुरू कर दिया।

सीबीआई के अनुसार, श्रीलक्ष्मी ने लोकसेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कथित तौर पर व्यवसायी और कर्नाटक के पूर्व मंत्री जी जनार्दन रेड्डी के स्वामित्व वाली ‘ओबुलपुरम माइनिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड’ का पक्ष लिया।

इसने आरोप लगाया कि उनके कार्यों से सरकार को धोखा देने में अन्य आरोपियों को मदद मिली और राजकोष को भारी नुकसान पहुंचा।

भाषा

नेत्रपाल रंजन

रंजन


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