ओडिशा बाढ़: आशा कार्यकर्ता ने बुजुर्ग महिला को पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान पहुंचाया

ओडिशा बाढ़: आशा कार्यकर्ता ने बुजुर्ग महिला को पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान पहुंचाया

ओडिशा बाढ़: आशा कार्यकर्ता ने बुजुर्ग महिला को पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान पहुंचाया
Modified Date: August 20, 2026 / 01:10 pm IST
Published Date: August 20, 2026 1:10 pm IST

भद्रक (ओडिशा), 20 अगस्त (भाषा) अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि हाल में आई ओडिशा की बाढ़ के दौरान 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला को पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने वाली आशा कार्यकर्ता की भद्रक जिला प्रशासन ने सराहना की है।

अधिकारियों के अनुसार, मिनती साहू ने घुटने तक भरे पानी में करीब 500 मीटर तक महिला को अपनी पीठ पर उठाकर धामनगर प्रखंड में स्थित एक सुरक्षित आश्रय स्थल तक पहुंचाया।

साहू ने बताया कि वह नडिगांव और भरतपुर क्षेत्रों के जलभराव वाले इलाकों में दवाइयां पहुंचा रही थीं और बाढ़ के कारण फैलने वाली संभावित बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक कर रही थीं।

अधिकारी के अनुसार, जब वह मौके पर पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि बसंता दास नामक बुजुर्ग महिला अपने घर के बरामदे में अकेली बैठी थीं। उस समय तक बाढ़ का पानी बरामदे तक पहुंच चुका था।

उन्होंने बताया कि दास अपने पैरों में संक्रमण के कारण खुद चलने में असमर्थ थीं और सामान्य दिनों में भी उन्हें चलने के लिए परिवार के सदस्यों के सहारे की जरूरत पड़ती थी। इस बीच, उनका बेटा अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर चिकित्सा केंद्र गया हुआ था।

अधिकारी ने बताया कि जैसे-जैसे बाढ़ का पानी बढ़ रहा था, महिला की जान को खतरा देखते हुए साहू तुरंत घुटने तक भरे पानी में उतरीं और दास को अपनी पीठ पर उठाकर चल पड़ीं।

उन्होंने बताया कि तेज बहाव के बीच साहू करीब आधा किलोमीटर तक पैदल चलीं और बुजुर्ग महिला को सुरक्षित रूप से पटाना सामुदायिक केंद्र पहुंचाया, जहां बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आश्रय स्थल बनाया गया था।

साहू ने कहा, ‘‘मैं नडिगांव और भरतपुर के जलभराव वाले गांवों में दवाइयां पहुंचाने और लोगों को बाढ़ के पानी से फैलने वाली बीमारियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह देने के लिए जा रही थी। जब मुझे करनपाल नदी के तटबंध टूटने की जानकारी मिली तो मैं वापस नडिगांव पहुंची, जहां मैंने बुजुर्ग महिला को घर के बरामदे में अकेले बैठे देखा। पानी वहां तक पहुंच चुका था। पैर में संक्रमण के कारण वह चल नहीं पा रही थीं, इसलिए मैंने उन्हें पटाना सामुदायिक केंद्र पहुंचाया।’’

अधिकारी ने कहा कि साहू के समय पर किए गए प्रयास से न केवल महिला को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका, बल्कि यह प्राकृतिक आपदाओं के दौरान कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में भी लोगों की सेवा करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भद्रक जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी (डीआईपीआरओ) मधुस्मिता सत्पथी ने कहा, ‘‘ऐसे साहस, मानवता और समर्पण के कार्य बाढ़ के दौरान लोगों की सेवा में लगे कर्मियों की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मिनती साहू का निस्वार्थ प्रयास वास्तव में प्रेरणादायक है।’’

भाषा

अमित मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में