ओडिशा सरकार के चिकित्सकों ने विरोधस्वरूप दो घंटे के लिए ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया

ओडिशा सरकार के चिकित्सकों ने विरोधस्वरूप दो घंटे के लिए ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया

ओडिशा सरकार के चिकित्सकों ने विरोधस्वरूप दो घंटे के लिए ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया
Modified Date: January 7, 2026 / 07:08 pm IST
Published Date: January 7, 2026 7:08 pm IST

भुवनेश्वर, सात जनवरी (भाषा) ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) के बैनर तले 6,000 से अधिक सरकारी चिकित्सकों ने रिक्त पदों को भरने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को दो घंटे के लिए बाह्यरोगी विभाग (ओपीडी) सेवा का बहिष्कार किया।

राज्य सरकार ने चिकित्सकों के आंदोलन को आवश्यक चिकित्सा सेवाओं में बाधा डालने के कारण मंगलवार को अवैध घोषित कर दिया था। आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) के प्रावधानों के अनुसार, चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, फार्मासिस्ट, पैरामेडिक और तकनीशियनों द्वारा हड़ताल किये जाने पर मंगलवार से छह महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है।

ओएमएसए के चिकित्सकों ने राज्य भर में सुबह नौ बजे से 11 बजे तक ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया। यह विरोध प्रदर्शन उनकी 10 सूत्री मांगों को पूरा कराने के लिए चल रहे आंदोलन का हिस्सा है। उनकी मांगों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतन, सभी ग्रेड में कैडरों का आनुपातिक पुनर्गठन, सुपर-स्पेशलिस्ट के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं।

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ओएमएसए के अध्यक्ष किशोर मिश्रा ने कहा, ‘चिकित्सकों की शांतिपूर्ण हड़ताल पर ओडिशा आवश्यक सेवा (रखरखाव) अधिनियम, 1988 (एस्मा) लागू करना दमन, असहिष्णुता और नौकरशाही हस्तक्षेप का हिस्सा माना जाता है। सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और चिकित्सकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना चाहिए।’

राज्य सरकार ने चिकित्सकों की 10 सूत्री मांगों पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया है।

चिकित्सकों के 26 दिसंबर से शुरू हुए ओपीडी बहिष्कार आंदोलन ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है।

भाषा नोमान सुरेश

सुरेश


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