ओडिशा: महिला सशक्तीकरण का श्रेय लेने को लेकर भाजपा और बीजद के बीच तीखी बहस

ओडिशा: महिला सशक्तीकरण का श्रेय लेने को लेकर भाजपा और बीजद के बीच तीखी बहस

ओडिशा: महिला सशक्तीकरण का श्रेय लेने को लेकर भाजपा और बीजद के बीच तीखी बहस
Modified Date: April 13, 2026 / 12:56 am IST
Published Date: April 13, 2026 12:56 am IST

भुवनेश्वर, 12 अप्रैल (भाषा) महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर विचार और उन्हें पारित करने के लिए संसद के तीन-दिवसीय विशेष सत्र से पहले, ओडिशा में भाजपा और बीजद के बीच रविवार को जुबानी जंग छिड़ गयी, जिसमें दोनों दल महिला सशक्तीकरण के सच्चे समर्थक होने का दावा कर रहे थे।

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया, जबकि बीजू जनता दल (बीजद) ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस तरह के आरक्षण के लिए संघर्ष किया था।

हालांकि, महिलाओं के लिए आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होना था। इसका मतलब यह था कि यदि वर्तमान कानून यथावत रहता, तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए, आधिकारिक तौर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाने जाने वाले इस अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता थी; और इसीलिए सरकार कानून में संशोधन के लिए विशेष सत्र बुला रही है।

ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिदा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘दशकों से देश की महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है, जबकि वे कुल जनसंख्या का लगभग 48.5 प्रतिशत हैं। इसके बावजूद, उनकी राजनीतिक भागीदारी सीमित रही है। समय बदल रहा है।’’

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश


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