ओडिशा: बचाए गए ओरंगुटान का एक्स-रे किया गया, डीएनए जांच के लिए रक्त के नमूने लिये गए

ओडिशा: बचाए गए ओरंगुटान का एक्स-रे किया गया, डीएनए जांच के लिए रक्त के नमूने लिये गए

ओडिशा: बचाए गए ओरंगुटान का एक्स-रे किया गया, डीएनए जांच के लिए रक्त के नमूने लिये गए
Modified Date: September 16, 2026 / 09:19 pm IST
Published Date: September 16, 2026 9:19 pm IST

भुवनेश्वर, 16 सितंबर (भाषा) भुवनेश्वर के नंदनकानन प्राणी उद्यान में पृथक-वास में रखे गए पांच ओरंगुटान की बुधवार को एक्स-रे जांच की गई और उनके रक्त के नमूने लिये गए ताकि प्रत्येक ओरंगुटान की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन और उनकी डीएनए जांच की जा सके। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

अधिकारियों ने बताया कि एक ओरंगुटान को बुखार होने के बाद 24 घंटे के भीतर दूसरी बार उसकी स्वास्थ्य जांच की गई। इन ओरंगुटान को हाल में ओडिशा के बालासोर जिले से बचाया गया था।

नंदनकानन प्राणी उद्यान के निदेशक सनत कुमार एन. ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ओरंगुटान की स्वास्थ्य स्थिति कुल मिलाकर स्थिर लग रही है। उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाने के लिए एक्स-रे और रक्त के नमूने लिये गए।’’

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रक्त के नमूनों का इस्तेमाल डीएनए जांच के लिए भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी जांच करने में सक्षम प्रयोगशाला की पहचान की जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘उपयुक्त प्रयोगशाला के पास तुलना के लिए ओरंगुटान के डीएनए नमूनों की मानक प्रोफाइल होनी चाहिए। ऐसी प्रयोगशालाएं बहुत आम नहीं हैं।’’

उन्होंने बताया कि रक्त के नमूनों में हीमोग्लोबिन और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या जैसे मानकों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जानवरों के मल और मूत्र के नमूनों की भी जांच की जा रही है।

ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ (सीडब्ल्यूएच) के प्रमुख आदित्य आचार्य ने कहा, ‘‘प्राथमिकता इन छोटे ओरंगुटान का कल्याण है। डीएनए जांच के संबंध में चिड़ियाघर के अधिकारी तय करेंगे कि नमूने कहां और कब भेजे जाएं।’’

अधिकारियों ने कहा कि बचाए गए जानवरों की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए डीएनए जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इससे जारी जांच में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि ओरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं और मुख्य रूप से बोर्नियो तथा सुमात्रा के वर्षावनों में पाए जाते हैं।

पांचों छोटे ओरंगुटान को आठ सितंबर को बालासोर जिले के एक जंगल से बचाया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि रविवार को इनमें से एक ओरंगुटान के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया था, जिसके बाद उसे दवा दी गई।

मंगलवार को ओडिशा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) द्वारा गठित तकनीकी समिति के सदस्यों ने पृथक-वास क्षेत्र का दौरा किया और पांचों ओरंगुटान की जांच की।

जांच के बाद चिड़ियाघर ने बताया कि पांचों जानवरों के शरीर का तापमान 98 से 99 डिग्री फारेनहाइट के बीच था।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘पांचों की स्थिति फिलहाल स्थिर है, वे सामान्य रूप से भोजन ले रहे हैं और उनकी गतिविधियों में सुधार हुआ है।’’

बचाए गए ओरंगुटान को 30 दिनों तक पृथक-वास में रखा जाना है।

विशेषज्ञों द्वारा तैयार आहार तालिका के अनुसार, जानवरों को हर दो घंटे में दूध दिया जा रहा है। इसके अलावा नियमित अंतराल पर सेब और केले का तरल आहार तथा उबले हुए आलू दिए जा रहे हैं।

इस बीच, ओडिशा पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के मामले में संयुक्त जांच शुरू की है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में अभी तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है।

भाषा अमित पवनेश

पवनेश


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