पन्ना बाघ अभयारण्य में अधिकारी का ‘होमस्टे’ वन विभाग की अनुमति के बिना बनाया गया: जांच रिपोर्ट

पन्ना बाघ अभयारण्य में अधिकारी का ‘होमस्टे’ वन विभाग की अनुमति के बिना बनाया गया: जांच रिपोर्ट

पन्ना बाघ अभयारण्य में अधिकारी का ‘होमस्टे’ वन विभाग की अनुमति के बिना बनाया गया: जांच रिपोर्ट
Modified Date: July 24, 2026 / 05:19 pm IST
Published Date: July 24, 2026 5:19 pm IST

(अलिंद चौहान)

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) पन्ना बाघ अभयारण्य के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी और उनकी पत्नी द्वारा कथित रूप से किए गए अवैध निर्माण की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने बताया कि संबंधित इमारत एक ‘होमस्टे’ थी।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि जिस 4.9 एकड़ जमीन पर यह निर्माण किया गया उसे वर्ष 2018 से 2022 के बीच मध्यप्रदेश वन विभाग की सहमति या जानकारी के बिना खरीदा गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड से पता चला कि यह जमीन वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार और उनकी पत्नी हिमानी सारद के नाम है।

हिमानी सारद उच्चतम न्यायालय में केंद्रीय जन सूचना अधिकारी हैं।

समिति ने बताया, “ऐसा प्रतीत होता है कि आवंटन करने वाले प्राधिकरण ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (डब्ल्यूपीए), 1972 और भारतीय वन अधिनियम (आईएफए) के प्रावधानों के विपरीत काम किया।”

यह समिति सितंबर 2025 में अवैध निर्माण के आरोप सामने आने के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित की गई थी।

समिति ने बताया कि संबंधित जमीन खसरा संख्या 1841 का हिस्सा है और यह जमीन 42.5 एकड़ क्षेत्र में फैली है तथा छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव में है।

वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस खसरा क्षेत्र की 35.8 एकड़ जमीन तीन वन क्षेत्रों पाटन-ए, अर्जुनहाई और टोरिया-बी में वन भूमि के रूप में शामिल है।

समिति ने बताया कि बाकी 6.7 एकड़ जमीन राजस्व भूमि है लेकिन मौके पर इसकी स्पष्ट सीमा तय नहीं है क्योंकि वहां सीमा स्तंभ मौजूद नहीं थे।

वर्ष 1982 में इन वन क्षेत्रों को पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में शामिल किया गया और बाद में वर्ष 2007 में इन्हें पन्ना बाघ अभयारण्य के कोर क्षेत्र का हिस्सा बनाया गया।

इसके बाद वर्ष 2024 में इसे पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया।

समिति ने पिछले साल एक और दो अक्टूबर को किए गए स्थलीय निरीक्षण में पाया कि संबंधित जमीन ‘कैडस्ट्रल मैप’ (किसी निर्धारित क्षेत्र में जमीन के टुकड़ों को दर्शाने वाला नक्शा) में चिन्हित वन क्षेत्र के अंदर स्थित है।

‘पीटीआई-भाषा’ के पास मौजूद रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने यह भी पाया कि निर्माण कार्य केन नदी और उससे लगे जंगल व कृषि भूमि के पास किया गया। जमीन पर कई संरचनाएं मौजूद थीं, जिनमें छह बड़े आकार के कॉटेज, एक स्विमिंग पूल, रसोई सह भोजन कक्ष, पूल के किनारे खाने की जगह और एक पावर रूम शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, वहां एक जिम, जल शुद्धिकरण संयंत्र, दो सफारी वाहन, एक ट्रैक्टर और एक नाव के साथ पार्किंग शेड तथा कर्मचारियों के रहने के लिए दो मंजिला इमारत भी बनाई गयी थी।

समिति ने बताया कि मौके पर संबंधित नियमों के तहत तय सीमा से अधिक क्षमता वाली एक आरा मशीन भी मिली, जिसे वन विभाग ने जब्त कर लिया।

समिति ने यह भी बताया कि जमीन मालिकों ने निर्माण के लिए ग्राम सभा की अनुमति तो ली थी लेकिन वन विभाग से मंजूरी नहीं ली।

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पन्ना बाघ अभयारण्य के कोर क्षेत्र में इमारत बनाने और आरा मिल चलाने के लिए अतिक्रमण के दो मामले दर्ज किए गए थे। इसके बावजूद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 34(ए) के तहत आवश्यक कार्रवाई करते हुए इन संरचनाओं को नहीं हटाया गया।”

उन्होंने कहा, “यह पन्ना बाघ अभयराण्य प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही को दर्शाता है। जहां केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित होकर विस्थापित हुए लोगों को रिजर्व क्षेत्र से हटाया जा रहा है, वहीं प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण पर अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं।”

मध्यप्रदेश वन विभाग और पन्ना बाघ अभयारण्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ के उन ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया, जिनमें यह पूछा गया था कि क्या इन संरचनाओं को तोड़ा गया है।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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