रूस से तेल खरीद और अमेरिकी विधेयक : भारत की घटनाक्रम पर करीबी नजर

रूस से तेल खरीद और अमेरिकी विधेयक : भारत की घटनाक्रम पर करीबी नजर

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 08:59 PM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 08:59 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 500 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने संबंधी प्रस्तावित अमेरिकी विधेयक से संबंधित घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए है।

भारत और चीन उन चुनिंदा देशों में शामिल हैं, जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं।

इस विधेयक को तैयार करने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस सप्ताह कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्तावित कानून को हरी झंडी दे दी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यहां अपनी साप्ताहिक प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘हमें प्रस्तावित विधेयक की जानकारी है। हम घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं।’’

रूस से कच्चे तेल की खरीद का भारत यह कहकर पुरजोर बचाव करता रहा है कि खरीद बाजार की गतिशीलता से निर्धारित है और देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए है।

जायसवाल ने कहा, ‘‘ऊर्जा स्रोतों के व्यापक प्रश्न पर हमारा रुख सर्वविदित है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में, हम वैश्विक बाजार की बदलती गतिशीलता और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से सस्ती ऊर्जा प्राप्त करने की अनिवार्यता से निर्देशित हैं।’’

बुधवार को सीनेटर ग्राहम ने कहा कि ट्रंप के साथ उनकी ‘‘अत्यंत सार्थक बैठक’’ हुई और राष्ट्रपति ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर महीनों से काम किया जा रहा था।

उन्होंने सोशल मीडिया पर इस सप्ताह कहा, ‘‘यह विधेयक ऐसे समय में लाया गया है, जब यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है, और पुतिन सिर्फ बातें कर रहे हैं तथा निर्दोषों को मारना जारी रखे हुए हैं। यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा, जो सस्ता रूसी तेल खरीदते हैं और पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा देते हैं।’’

ग्राहम ने कहा, ‘‘यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ जबरदस्त दबाव बनाने की शक्ति देगा, ताकि उन्हें सस्ते रूसी तेल की खरीद बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, जिससे यूक्रेन के खिलाफ पुतिन को रक्तपात के लिए वित्तपोषण मिलता है।’’

इस विधेयक में रूसी तेल की द्वितीयक खरीद और पुनर्विक्रय पर 500 प्रतिशत ‘टैरिफ’ लगाने का प्रस्ताव है।

इस सप्ताह की शुरुआत में, ग्राहम ने कहा कि अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने उन्हें नयी दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद में कमी किए जाने के बारे में सूचित किया और उनसे राष्ट्रपति ट्रंप को भारत पर लगाए गए ‘‘टैरिफ में राहत’’ देने के लिए कहने को कहा।

अमेरिका भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के लिए यह कहकर दबाव डाल रहा है कि मॉस्को तेल से मिलने वाली आय का उपयोग करके यूक्रेन के खिलाफ अपने युद्ध को वित्त षित कर रहा है।

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए जाने और उसकी आपूर्ति अवरुद्ध किए जाने बाद भारत ने रियायती दरों पर बेचे जा रहे रूसी तेल की खरीद शुरू कर दी थी। परिणामस्वरूप, 2019-20 में कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी मात्र 1.7 प्रतिशत के मुकाबले 2024-25 में बढ़कर 35.1 प्रतिशत हो गई।

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप