व्यापार जारी रखने के लिए ओमान ने बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन किया: महावाणिज्यदूत

व्यापार जारी रखने के लिए ओमान ने बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन किया: महावाणिज्यदूत

व्यापार जारी रखने के लिए ओमान ने बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन किया: महावाणिज्यदूत
Modified Date: August 20, 2026 / 07:07 pm IST
Published Date: August 20, 2026 7:07 pm IST

अहमदाबाद, 20 अगस्त (भाषा) ओमान का मानना है कि क्षेत्रीय संकटों से निपटने के लिए बातचीत व अंतरराष्ट्रीय कानून ‘‘सबसे बेहतर माध्यम’’ हैं और उसे उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित नहीं होंगी।

ओमान के महावाणिज्यदूत महबूब ईसा अल रईसी ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।

उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आशंकाओं के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संभावित व्यवधान को कम करने के लिए ओमान द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही।

अल रईसी ने यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के तीसरे गुजरात निर्यात सम्मेलन के इतर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ओमान क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को भी बढ़ावा दे रहा है। हमारा मानना है कि क्षेत्र से जुड़े किसी भी तरह के संकट की स्थिति में बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून का इस्तेमाल करना सबसे बेहतर माध्यम है। ऐसे मुद्दों को बढ़ाने के बजाय बातचीत जारी रखनी चाहिए।’’

महावाणिज्यदूत ने कहा, ‘‘इसलिए हमारा मानना है कि आपूर्ति शृंखला पहले की तरह सुचारु और निर्बाध बनी रहेगी।’’

अल रईसी ने इससे पहले सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार परिदृश्य में व्यापक बदलाव हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम, तकनीकी बदलाव और आर्थिक अनिश्चितता यह दिखा रहे हैं कि व्यापार व निवेश के स्थापित तौर-तरीके कितनी तेजी से बदल सकते हैं।

अल रईसी ने कहा, ‘‘व्यापार अवसर सृजित करता है, प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाती है, लेकिन विश्वास ही व्यावसायिक संबंधों को दीर्घकालिक साझेदारी में बदलता है।’’

उन्होंने कहा कि ओमान और भारत के संबंधों की पहचान लंबे समय से विश्वास, मित्रता और आपसी सम्मान से रही है।

महावाणिज्यदूत ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध उन व्यापारियों, नाविकों और उद्यमियों के जरिए बने, जो सामान, विचारों और संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए अरब सागर पार करते थे।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सबसे शुरुआती और मजबूत संबंध भारत के पश्चिमी तट, खासकर गुजरात के साथ रहे हैं।

अल रईसी ने कहा कि गुजरात के बंदरगाहों और व्यापारिक समुदायों ने दोनों देशों के लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि आज ओमान और भारत के बीच व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा व पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में व्यापक रणनीतिक साझेदारी है।

महावाणिज्यदूत ने भारत को ओमान के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के कारोबारियों और लोगों के बीच दशकों से कायम आपसी विश्वास ने इस संबंध को और मजबूत किया है।

भाषा जितेंद्र संतोष

संतोष


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