परीक्षा सुधारों पर कामकोटी ने कहा, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले की विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती

परीक्षा सुधारों पर कामकोटी ने कहा, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले की विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती

परीक्षा सुधारों पर कामकोटी ने कहा, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले की विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती
Modified Date: July 27, 2026 / 09:40 pm IST
Published Date: July 27, 2026 9:40 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) परीक्षा सुधारों पर केंद्र के कार्यबल के सदस्य और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)- मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी ने सोमवार को कहा कि परीक्षाओं के संचालन में सबसे बड़ी चुनौती प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति की ईमानदारी और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधारों की सिफारिश करने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह-सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के गठन की रविवार को घोषणा की।

पद्म पुरस्कार से सम्मानित कामकोटी ने कहा कि पिछले चार दशकों में सार्वजनिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में तकनीक का इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

कामकोटी ने कहा, ‘‘किसी भी परीक्षा प्रणाली में दो समूहों के लोगों का भरोसेमंद होना बेहद जरूरी है। पहला समूह प्रश्नपत्र तैयार करने वालों का है। वे सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। दूसरा समूह परीक्षा केंद्रों पर तैनात निरीक्षकों का होता है। मेरे विचार से सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वालों के बीच भरोसा कैसे कायम किया जाए और उसे लंबे समय तक बनाए रखा जाए।’’

चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत में कामकोटी ने कहा, ‘‘परीक्षा केंद्रों पर निगरानी के लिए हम पहले ही कैमरों की व्यवस्था शुरू कर चुके हैं। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा अब भी प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति की ईमानदारी और विश्वसनीयता का ही है।’’

कामकोटी ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं कई वर्षों से आयोजित की जा रही हैं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जो बदलाव आया है, वह परीक्षा के पैमाने में है। अगर आप नीट-यूजी 2024 को देखें तो प्रश्नपत्र छपने के बाद उन्हें ले जाने के दौरान लीक हुआ था। प्रश्नपत्रों को डिब्बों में पैक कर वितरण केंद्र भेजा गया था। वहां से उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान कहीं प्रश्नपत्र लीक हुआ। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया था कि यह घटना सीमित दायरे में रही और इससे केवल करीब 40 से 50 छात्र प्रभावित हुए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘2026 में भी प्रश्नपत्र लीक की घटना सामने आई। लेकिन इस बार लीक 2024 की तरह वितरण प्रक्रिया के दौरान नहीं हुआ था। 2024 में प्रश्नपत्र वितरण के दौरान लीक हुआ था। इस बार प्रश्नपत्र राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के परिसर से ले जाने के बाद छपाई, पैकिंग और वितरण की पूरी प्रक्रिया से गुजरते हुए परीक्षा के दिन केंद्र पर छात्रों तक पहुंचा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई लीक नहीं हुआ। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र लीक की शुरुआत प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति के स्तर से हुई थी।’’

कामकोटी ने कहा कि मूल चुनौती विश्वास की है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसे शिक्षकों की जरूरत है, जिनपर हम भरोसा कर सकें। ऐसे लोग जो प्रश्नपत्र तैयार करें, उसकी पूरी गोपनीयता बनाए रखें और उसकी सामग्री का खुलासा किए बिना अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं। यही हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है।’’

नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में 36 दिन का आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ। इसके एक दिन बाद परीक्षा सुधारों के लिए कार्यबल का गठन किया गया।

एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सुधार के लिए गठित इस कार्यबल में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक बहुविषयक समूह शामिल होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘समिति के रूप में मेरा मानना है कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम एक ऐसी पारदर्शी, मजबूत, प्रश्नपत्र लीक से मुक्त और तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली तैयार करने के अपने दायित्व को पूरा करें, जो बड़े स्तर पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सके। यही संरचनात्मक सुधार के मायने हैं।’’

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिये प्रश्नपत्र तैयार करने में मदद मिलने के सवाल पर कामकोटी ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि एआई अपने आप पूरी तरह प्रश्नपत्र तैयार कर सकता है। एआई प्रश्न तैयार करने में सक्षम हो सकता है, लेकिन उनकी समीक्षा किसी व्यक्ति को ही करनी होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नीट इस मामले में काफी समावेशी परीक्षा है। इसका आयोजन 12 भाषाओं में किया जाता है, इसलिए अनुवाद की जांच भी किसी विशेषज्ञ को करनी होगी। एआई निश्चित रूप से अनुवाद में मदद कर सकता है, लेकिन अनुवाद की सावधानीपूर्वक जांच करना जरूरी होगा।’’

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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