‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से दीर्घकालिक नीतिगत लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा: उपराष्ट्रपति

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से दीर्घकालिक नीतिगत लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा: उपराष्ट्रपति

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से दीर्घकालिक नीतिगत लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा: उपराष्ट्रपति
Modified Date: February 21, 2026 / 09:44 pm IST
Published Date: February 21, 2026 9:44 pm IST

(फाइल फोटो सहित)

नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा को लागू करने से मजबूत निर्णय लेने और दीर्घकालिक नीतिगत ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप’ द्वारा भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन 2026 में यह टिप्पणी की। उपराष्ट्रपति ने जनभागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में चुनावी प्रक्रियाओं के महत्व पर जोर दिया।

राधाकृष्णन ने कहा कि जब संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो समाज और राष्ट्र सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं, और इस बात पर जोर दिया कि भारत की यात्रा के इस परिवर्तनकारी क्षण में ऐसा सहयोग महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में देश की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ढांचागत सुधारों, समावेशी विस्तार, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचा विकास ने 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है और सभी क्षेत्रों और समुदायों में आकांक्षाओं को बढ़ाया है।

राधाकृष्णन ने कहा कि विकास के अगले चरण में सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच गहरी साझेदारी की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) अब किनारे पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति के केंद्र में है, और इसे उस स्थान के रूप में बताया जहां व्यापार सहानुभूति से मिलता है, जहां बैलेंस शीट मानव कहानियों से जुड़ती हैं, और जहां विकास को एक उद्देश्य मिलता है।

भारत के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास व्यापक आधार वाला होना चाहिए, समृद्धि समावेशी होनी चाहिए और स्थिरता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने जनभागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में चुनावी प्रक्रियाओं के महत्व पर जोर दिया और यह विचार साझा किया कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा को लागू करने से बेहतर निर्णय लेने और दीर्घकालिक नीतिगत लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।

भाषा आशीष माधव

माधव


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