राज्यसभा में विपक्ष का आरोप : सरकार हड़बड़ी में पारित करा रही जन विश्वास विधेयक

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राज्यसभा में विपक्ष का आरोप : सरकार हड़बड़ी में पारित करा रही जन विश्वास विधेयक

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  • Publish Date - April 2, 2026 / 05:49 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 05:49 PM IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) राज्यसभा में बृहस्पतिवार को विपक्षी दलों के कई सदस्यों ने जन विश्वास विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि वह इसे पारित कराने में हड़बड़ी कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने इसे लोगों को जटिल न्यायिक प्रक्रियाओं से राहत दिलाने एवं विकास, नवाचार एवं व्यापार को बढ़ावा देने वाला विधेयक बताया।

उच्च सदन में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस सदस्य शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि यह 340 पन्नों का विधेयक है जिसमें 79 कानूनों में सुधार का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक का नाम भले ही जन विश्वास हो लेकिन यह वास्तव में जनता के साथ विश्वासघात है।

उन्होंने कहा कि संसद में कानून बनाने की एक प्रक्रिया है लेकिन सरकार उसका पालन नहीं कर रही है और काफी जल्दबाजी में है। उन्होंने कहा कि पूरक कार्यसूची के जरिए इस विधेयक को राज्यसभा में लाया गया और सदस्यों को इसका अध्ययन करने तथा संशोधन पेश करने के लिए काफी कम समय मिला।

उन्होंने कहा कि कानूनों का दूरगामी प्रभाव होता है और इसलिए विधेयकों को व्यापक चर्चा के बाद पारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधेयक कल देर शाम लोकसभा में पास हुआ और सुबह तक यहां संशोधन कैसे पेश किए जा सकते हैं?

उन्होंने आसन से अनुरोध किया कि वह ऐसे मामलों में सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करे और सरकार कानून बनाने में हड़बड़ी नहीं करे। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि अगर कानून पुराना है तो वह अप्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कुछ कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि विभिन्न अपराधों के लिए सजा बढ़ाने की जरूरत है न कि कम करने की।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि दवाइयों या कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने में गड़बड़ी करने वालों को पहले जेल भेजने का प्रावधान था लेकिन अब सिर्फ एक लाख रुपये के जुर्माना का प्रावधान किया गया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे प्रावधान से अपराध पर काबू पाना कठिन हो जाएगा।

उन्होंने मानहानि संबंधी कानून में संशोधन किए जाने की मांग की और कहा कि इस कानून का काफी दुरूपयोग होता रहा है और न्यायालय से आरोपमुक्त होने तक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेता राहुल गांधी का उदाहरण सामने है।

उन्होंने सरकार से डिजिटल धोखाधड़ी के मामले में सख्ती से कार्रवाई करने की भी मांग की।

इससे पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विधेयक को चर्चा के लिए सदन में पेश किया।

प्रस्तावित कानून में देश के कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने के वास्ते 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन किया गया है।

भाजपा के लहर सिंह सिरोहा ने जन विश्वास विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि इससे छोटे दुकानदारों और आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहले मामूली और छोटे-मोटे अपराधों पर भी दंड दिया जाता था और जेल भेज दिया जाता था। लेकिन इस विधेयक में लोगों को राहत देने का प्रस्ताव किया गया है।

उन्होंने कहा कि पहले मामूली बात पर लोगों को, छोटे कारोबारियों को आयकर का नोटिस मिल जाता था और लोगों को परेशानी होती थी लेकिन सरकार द्वारा किए गए उपायों के कारण लोगों को काफी राहत मिली है।

भाजपा सदस्य ने कहा कि व्यापक चर्चा के बाद यह विधेयक लाया गया है और यह नागरिक केंद्रित है जिससे लोगों को जटिल न्यायिक प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी और विकास, नवाचार, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक ने सवाल किया कि सरकार जल्दबाजी में क्यों है और बजट सत्र के आखिर में इसे लाने की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार ‘‘कारोबार में सुगमता’’ का जिक्र करती है लेकिन अगर उसे वास्तव में ‘‘कारोबार में सुगमता’’ देखना है तो उसे बंगाल का रुख करना होगा जहां सरकार की नीतियों के कारण कई कंपनियां आई हैं और विकास को बल मिला है।

उनके भाषण का एक हिस्सा बांग्ला में था। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। इस पर आसन ने उन्हें विधेयक पर बोलने के लिए कहा लेकिन हक गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करते रहे और फिर उन्होंने सदन से वाकआउट किया।

द्रमुक सदस्य पी विल्सन ने भी विधेयक की आलोचना की और कहा कि यह सुधारों के लिए नहीं बल्कि जवाबदेही में कमी लाने वाला विधेयक है। उन्होंने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने की मांग की ताकि इस पर व्यापक चर्चा हो सके।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून में जुर्माना देकर विभिन्न सजा से बचने का प्रावधान किया गया है जिससे अपराध को बढ़ावा मिल सकता है।

भाषा अविनाश मनीषा

मनीषा

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