विपक्ष ने वीबी-जी राम जी और एसआईआर पर चर्चा की मांग की, सरकार ने कहा: ‘रिवर्स गियर’ में नहीं जा सकते

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विपक्ष ने वीबी-जी राम जी और एसआईआर पर चर्चा की मांग की, सरकार ने कहा: ‘रिवर्स गियर’ में नहीं जा सकते

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 05:36 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 05:36 PM IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) सरकार ने बुधवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दौरान ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की विपक्ष की मांग को मंगलवार को अस्वीकार कर दिया और कहा कि दोनों विषय पर पहले चर्चा हो चुकी है तथा अब ‘‘हम रिवर्स गियर में नहीं जा सकते।’’

बजट सत्र से एक दिन पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने इन दोनों विषयों पर चर्चा की मांग उठाई।

बैठक के दौरान, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास सहित कई विपक्षी सदस्यों ने सत्र के लिए सरकारी कामकाज का एजेंडा सामने नहीं रखे जाने पर आपत्ति जताई, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि यह उचित समय पर किया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि विपक्षी सदस्य मतदाता सूचियों के एसआईआर, मनरेगा योजना की जगह लाए गए विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, विदेश नीति के मामले, वायु प्रदूषण, अर्थव्यवस्था की स्थिति, किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं।

बीते शीतकालीन सत्र के दौरान संसद द्वारा पारित विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम पर चर्चा के लिए विपक्ष की मांग पर मंत्री ने कहा, ‘‘एक बार जब कोई कानून देश के सामने आ जाता है, तो हमें उसका पालन करना होता है। हम रिवर्स गियर में वापस नहीं जा सकते।’’

उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दे रखे हैं और इन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट पर चर्चा के दौरान उठाया जा सकता है।

कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा सत्र के लिए विधायी एजेंडा साझा नहीं किए जाने की शिकायत के बाद रीजीजू ने कहा, ‘‘यह साल का पहला सत्र है। आम तौर पर, सरकारी कामकाज की सूची राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद साझा की जाती है। हालांकि, मैं सूची साझा करने के लिए तैयार हूं, मैंने अधिकारियों को ऐसा करने के लिए भी कहा है।’

उन्होंने कहा कि यह कोई महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है और सदन को सुचारु रूप से चलाने पर ध्यान केंद्रित है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा की मांग पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘संसद के दोनों सदनों में पिछले सत्र में चुनाव सुधारों पर व्यापक चर्चा हुई थी, जहां विपक्ष ने भी यह मुद्दा उठाया था। अगर एक और बहस की मांग की जाती है तो यह अनुचित है।’’

मंत्री ने अपील की कि सदस्य अपने मुद्दे उठाएं लेकिन कोई हंगामा नहीं होना चाहिए।

रीजीजू का कहना था, ‘‘सरकार की ओर से सभी माननीय सदस्यों से मेरी अपील है कि हमारे संसदीय लोकतंत्र में हम लोगों का प्रतिनिधित्व करने और लोगों की आवाज उठाने के लिए चुने गए हैं। बोलने के अपने अधिकार का उपयोग करते समय, हमें अन्य राजनीतिक दलों के सदस्यों को सुनने का भी कर्तव्य निभाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि पिछले सत्र के दौरान एसआईआर के मुद्दे पर ‘‘मैराथन चर्चा’’ कराई की गई थी, जब संसद में चुनाव सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।

रीजीजू ने कहा, ‘‘सभी सदस्यों को पर्याप्त समय दिया गया था और पार्टियों ने (उस विषय पर) अपनी सारी ऊर्जा खर्च कर दी।’’

कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि बुधवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में मनरेगा, मोदी सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट, वायु प्रदूषण और जनहित के कई अन्य विषयों को उठाया जाएगा।

राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘‘विपक्ष विदेश नीति का विषय भी उठाएगा। हमारी विदेश नीति कहां पहुंच गई? कोई हमारे साथ खड़ा नहीं है। हमें यह भी नहीं पता चल रहा कि किसके साथ चलें, कौन हमारे साथ चलेगा।’’

उनका कहना था कि सरकार की आर्थिक नीति की बात करें तो रुपया सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

तिवारी ने कहा, ‘‘अमेरिका की ओर से लगातार टैरिफ जारी है और रूसी तेल (की खरीद) का मुद्दा भी है। दिल्ली और दूसरी जगहों पर हमने वायु प्रदूषण का जो सबसे भयानक रूप देखा है, उसे देखते हुए हम यह मुद्दा भी उठाएंगे… हम इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठाएंगे।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस योजना की जगह नया कानून लाकर न केवल इसके नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, बल्कि ‘‘ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार खत्म किया जा रहा है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, ‘वोट चोरी’ और बेरोजगारी के मुद्दों को भी इस सत्र के दौरान उठाया जाएगा।

तेलुगु देसम पार्टी (तेदेपा) के सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायालू ने कहा कि भारत जिन अलग-अलग मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर कर रहा है, उन पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने हैदराबाद की तर्ज पर अमरावती को ‘कानूनी दर्जा’ देने की भी मांग की।

बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ‘‘ओडिशा में किसानों की परेशानी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का विषय उठाएगी’’।

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा