UGC New Rules Controversy: UGC के नए नियम को लेकर संतों ने खोला मोर्चा, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, की इच्छामृत्यु की मांग

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UGC New Rules Controversy: UGC के नए नियम को लेकर संतों ने खोला मोर्चा, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, की इच्छामृत्यु की मांग

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 05:42 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 05:43 PM IST

UGC New Rules Controversy | Photo Credit: IBC24 Customize

HIGHLIGHTS
  • 15 जनवरी से UGC Rules 2026 लागू
  • जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने जताया विरोध
  • प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नियम वापस लेने या इच्छामृत्यु की मांग

नई दिल्ली: UGC New Rules Controversy देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में UGC Rules 2026 को 15 जनवरी से लागू कर दिया गया है। नए नियम लागू होते ही इसे लेकर देशभर में विवाद और विरोध शुरू हो गया है। इसी बीच विश्व हिंदू सिख महापरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य में मोर्चा खोल दिया है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े प्रस्ताव को वापस लेने या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की है।

UGC Rules 2026: नए नियमों और नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अपने पत्र में UGC के नए नियमों और नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि ‘UGC के नए नियमावली से राष्ट्र अस्वस्थ्य हो गया है। स्वर्णों की ​बेटियों को बलत्कार के लिए मजबूर किया जा रहा है। जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। देश को तबाह कर रहे हैं। अपराध और अत्याचार को बढ़ावा दे रहे हैं। हम लोग भाजपा को प्राण से भी अधिक महत्व देते हैं। अत: UGC को वापस ले देश को बचा ले।’

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पत्र में यह भी कहा है कि यदि सरकार इस विषय पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो वे अपना विरोध और अधिक तीव्र करेंगे। उनका कहना है कि यह कदम उन्होंने राष्ट्रहित में उठाया है और वे इसे लेकर किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।

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UGC Rules 2026 कब लागू हुए?

ये नियम 15 जनवरी 2026 से देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए गए।

इन नियमों का उद्देश्य क्या है?

इनका उद्देश्य कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ में जातिगत भेदभाव रोकना और समानता सुनिश्चित करना है।

विरोध क्यों हो रहा है?

छात्रों, शिक्षकों और संगठनों का कहना है कि ये नियम शैक्षणिक स्वायत्तता को प्रभावित करेंगे और शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डालेंगे।