नीट मामले पर विपक्ष ने कहा: मोदी सरकार का अमृतकाल असल में ‘विषकाल’

नीट मामले पर विपक्ष ने कहा: मोदी सरकार का अमृतकाल असल में ‘विषकाल’

नीट मामले पर विपक्ष ने कहा: मोदी सरकार का अमृतकाल असल में ‘विषकाल’
Modified Date: May 12, 2026 / 07:49 pm IST
Published Date: May 12, 2026 7:49 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) विपक्षी दलों ने अनियमितताओं के आरोपों के चलते मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी-2026’ को रद्द किए जाने के बाद मंगलवार को केंद्र सरकार पर हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तथाकथित अमृतकाल असल में ‘विषकाल’ है, जिसमें युवाओं के भविष्य की चोरी की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर कई बार गंभीर प्रश्नचिन्ह लग चुके हैं और ऐसे में उसके पूरे तंत्र में व्यापक परिवर्तन की जरूरत है।

एनटीए ने तीन मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी-2026’ को इसका प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के मद्देनजर मंगलवार को रद्द करने की घोषणा की तथा सरकार ने सीबीआई को इन ‘अनियमितताओं’ की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया।

एनटीए ने कहा कि यह परीक्षा अलग से अधिसूचित तिथियों पर पुनः आयोजित की जायेगी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘नीट 2026 की परीक्षा रद्द हो गई। 22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया। किसी पिता ने कर्ज़ लिया, किसी मां ने गहने बेचे, लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की और बदले में मिला- पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।’’

उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ़ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का कहना था, ‘‘हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं। अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे।’’

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुंच से तय होगी तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?’’

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट परीक्षा रद्द होने से प्रभावित विद्यार्थियों को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करना होगा क्योंकि सरकार केवल आंदोलन की भाषा समझती है।

केजरीवाल ने प्रश्नपत्र लीक मामले में ‘राजनीतिक संरक्षण’ का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले नौ वर्ष में नीट का प्रश्नपत्र चार बार लीक हुआ और किसी भी आरोपी को सजा नहीं मिली है।

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि लाखों छात्रों के जीवन को ‘अव्यवस्था और चिंता’ में डाल दिया गया है।

उन्होंने जवाबदेही नहीं होने का आरोप लगाया और सरकार पर ‘दैनिक प्रशासन में अक्षम’ होने का आरोप लगाया।

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि एनटीए एक ‘अक्षम’ संस्था है और वह संसद के भीतर भी यह विषय उठा चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘मैंने संसद में कहा था, इसे बंगाल की खाड़ी में फेंक दो। क्या आपने कभी सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों पर प्रभाव के बारे में सोचा है? सीबीआई जांच एक दिखावा है। यह बेहद असंवेदनशील है।’

माकपा के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने कहा कि परीक्षाएं आयोजित कराने में बार-बार असफल होने से जनता का व्यवस्था में भरोसा कम हो रहा है।

भाषा हक

हक अविनाश

अविनाश


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