विपक्षी दलों ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की निंदा की, केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की
विपक्षी दलों ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की निंदा की, केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) वामपंथी दलों, द्रमुक, समाजवादी पार्टी,राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी और वीसीके सहित विपक्षी दलों ने सोमवार को वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के “अपहरण” की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।
यहां आयोजित एक जनसभा में, इन दलों के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला और उस पर इन घटनाओं पर मौन रहने का आरोप लगाया।
इस जनसभा को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता प्रकाश करात और एम.ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी. राजा, द्रविड़ मुनेत्र कषगम के तिरुचि शिव, भाकपा (माले) लिबरेशन के रवि राय, वीसीके के थिरुमावलवन, एआईएफबी के जी. देवराजन और आरएसपी के आर.एस. डागर ने संबोधित किया, जबकि राजद के मनोज झा, सपा के जावेद अली और आप के संदीप पाठक के संदेश पढ़े गए क्योंकि वे व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके थे।
वक्ताओं ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की “साम्राज्यवादी आक्रामकता” की स्पष्ट रूप से निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत का घोर उल्लंघन बताया।
उन्होंने अमेरिकी आक्रामकता को वेनेजुएला के तेल पर कब्जा करने का “बेशर्म प्रयास” बताया और कहा कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, 2025, कुख्यात मोनरो सिद्धांत के ट्रंप उपसिद्धांत को लागू करने के अपने इरादे की घोषणा करती है, जिसका उद्देश्य पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र पर प्रभुत्व स्थापित करना है।
विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) में शामिल दलों ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की। हालांकि, सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस बैठक का हिस्सा नहीं थी।
प्रस्ताव में कहा गया है, “भारत के लोग अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता को महत्व देते हैं और सभी देशों के लोगों के लिए भी यही कामना करते हैं।”
इसमें कहा गया, “हालांकि, भाजपा के नेतृत्व वाली वर्तमान केंद्र सरकार की विदेश नीति इस परंपरा से हट गई है। सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक गई है और ‘ग्लोबल साउथ’ के अधिकारों की रक्षा करने के प्रति अनिच्छुक है।”
माकपा नेता प्रकाश करात ने कहा कि इस मामले पर केंद्र का रुख भारत की जनता के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करता है।
भाषा प्रशांत संतोष
संतोष

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