ईटानगर, आठ अगस्त (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में पिछले एक महीने में मुंहपका-खुरपका बीमारी के प्रकोप से 200 से अधिक मिथुनों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मिथुन एक बड़ा, जंगली बैल जैसा गोजातीय पशु है, जिसे वैज्ञानिक रूप से गायल भी कहा जाता है
राज्य सरकार ने बीमारी के प्रकोप के मद्देनजर विशेषज्ञों की एक टीम भेजी है और पूर्वी जिलों में पशु चिकित्सा अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
दिबांग घाटी के जिला पशु चिकित्सा अधिकारी (डीवीओ) डॉ. दाम्मो रिबा ने बताया कि सबसे अधिक मौतें अचेसो गांव में हुई हैं, जहां 90 से अधिक मिथुन मर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि इसके बाद अंग्रिम में 50 से अधिक और एएलजी गांव में तीन मिथुनों की मौत हुई है।
रिबा ने बताया कि बीमारी अरोपो, गिपुलिन और कई अन्य गांवों में भी फैल गई है, जहां बड़ी संख्या में संक्रमण के मामले सामने आए हैं।
21वीं पशुधन गणना के अनुसार, जिले में मिथुनों की कुल संख्या 3,925 है।
प्रभावित इलाकों में पशु चिकित्सा टीमों ने अभियान तेज कर दिया है।
टीमें मौके पर जाकर स्थिति का जायजा ले रही हैं और बीमार पशुओं को दवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
रिबा ने बताया कि वह स्थिति पर नजर रखने और बीमार मिथुनों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पंचायत नेताओं तथा मिथुन पालकों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
भाषा जितेंद्र रंजन
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