महिलाओं में स्तन कैंसर की जांच के तरीके में हो रहे बदलाव के मायने

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महिलाओं में स्तन कैंसर की जांच के तरीके में हो रहे बदलाव के मायने

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 05:37 PM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 05:37 PM IST

(जेनिफर स्टोन, द यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया)

पर्थ (ऑस्ट्रेलिया), आठ अगस्त (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं में स्तन कैंसर की जांच के तरीके में बदलाव हो रहा है। हाल में जारी एक समीक्षा के अनुसार अब जांच मुख्य रूप से किसी व्यक्ति की उम्र के आधार पर करने के बजाय, उसके व्यक्तिगत जोखिमपूर्ण कारकों के हिसाब से की जाएगी।

इसका मतलब यह हो सकता है कि स्तन कैंसर के अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान करने और उन्हें लक्षित करने के लिए पारिवारिक इतिहास, आनुवंशिक परीक्षण और कृत्रिम मेधा (एआई) जैसी जानकारियों का इस्तेमाल किया जाए।

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में लंबे समय से जारी ‘ब्रेस्टस्क्रीन’ कार्यक्रम में बदलाव तुरंत नहीं किए जाएंगे। इन बदलावों को अगले दस वर्षों में धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जायेगा।

तो उन महिलाओं के लिए इसका क्या मतलब हो सकता है, जिनमें स्तन कैंसर का जोखिम अधिक हो सकता है?

आखिरकार ‘जोखिम’ की इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

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महिला के जोखिम की श्रेणी के आधार पर जांच करने से कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाने और स्तन कैंसर के इलाज के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए जांच के तरीके और उसकी आवृत्ति को व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार तय किया जा सकता है। इसे ‘जोखिम-आधारित जांच’ कहा जाता है।

लेकिन फिलहाल, ‘ब्रेस्टस्क्रीन’ कार्यक्रमों में जोखिम के आधार पर जांच का दायरा सीमित है। वर्तमान में, जिन महिलाओं के परिवार में स्तन या अंडाशय के कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें हर दो साल के बजाय हर साल जांच कराने की सलाह दी जाती है।

हम यह काफी हद तक जानते हैं कि किन कारणों से किसी व्यक्ति में स्तन कैंसर होने का जोखिम अधिक हो सकता है। लेकिन इन सभी जानकारियों को अभी तक व्यावहारिक रूप से लागू नहीं किया गया है।

इसका मतलब है कि लोगों के व्यक्तिगत जोखिम को कम करने, कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाने और लोगों की जान बचाने के अवसर अब तक सीमित रहे हैं।

हम जो जानते हैं, उसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?

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स्तन कैंसर के सबसे प्रमुख और आम जोखिम कारकों में से एक ‘स्तन घनत्व’ है। ‘स्तन घनत्व’ से आशय मैमोग्राम में दिखाई देने वाले सफेद हिस्से यानी ‘फाइब्रो-ग्लैंड्युलर’ ऊतक से है। अधिक ‘स्तन घनत्व’ (जिनमें ग्रंथीय ऊतक अधिक रहते हैं) वाली महिलाओं में स्तन कैंसर होने का जोखिम काफी अधिक होता है और जांच के दौरान कैंसर का पता न चल पाने की संभावना भी अधिक होती है।”‘ब्रेस्टस्क्रीन’ की सिफारिश है कि जांच के समय सभी महिलाओं को उनके स्तनों के घनत्व के बारे में जानकारी दी जाए।

पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिक जांच

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ऑनलाइन जोखिम आकलन उपकरण स्तनों के घनत्व के साथ-साथ स्तन कैंसर के जोखिम से जुड़ी अन्य जानकारियों-जैसे पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिक जांच के नतीजों—को मिलाकर किसी महिला में स्तन कैंसर के व्यक्तिगत जोखिम का आकलन करते हैं।

इन दोनों के आधार पर यह तय करने के लिए चर्चा की जा सकती है कि किसी महिला में स्तन कैंसर के जोखिम को बेहतर तरीके से कैसे कम किया जा सकता है।

आनुवंशिक जांच के नतीजों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति में स्तन कैंसर होने के जोखिम का आकलन करने के लिए किया जा सकता है।

एआई (कृत्रिम मेधा) का क्या?

एआई का इस्तेमाल मैमोग्राफी की तस्वीरों का विश्लेषण करने और कैंसर का पता लगाने में मदद के लिए किया जा सकता है। यह भविष्य में किसी व्यक्ति को बीमारी होने के जोखिम का अनुमान लगाने में भी मदद कर सकता है।

इससे रेडियोलॉजी विशेषज्ञों पर काम का बोझ कम हो सकता है और यह तय करने में भी मदद मिल सकती है कि किन महिलाओं को आगे की जांच के लिए दोबारा बुलाया जाना चाहिए।

ऑस्ट्रेलियाई आंकड़ों का इस्तेमाल करके तैयार किए गए एक एआई मॉडल का फिलहाल ब्रेस्टस्क्रीन विक्टोरिया में परीक्षण किया जा रहा है और जल्द ही इसे दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में भी इस्तेमाल किया जाएगा।

महिलाओं को सलाह दी जाती है कि जब उनकी अगली मैमोग्राफी का समय आए, तो वे ब्रेस्टस्क्रीन के तहत अपनी जांच जरूर करवाएं। चालीस वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं हर दो साल में मुफ्त मैमोग्राफी करा सकती हैं।

महिलाओं को यह भी सलाह दी जाती है कि वे अपने स्तनों के स्वास्थ्य के बारे में नियमित रूप से डॉक्टर से बात करें और यदि उनमें कोई नया लक्षण दिखाई दे, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। इन लक्षणों में स्तन में गांठ, स्तन के आकार में बदलाव या स्तन में लगातार बना रहने वाला दर्द शामिल हैं।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र संतोष

संतोष