चार दशकों में अंतरराज्यीय सीमा विवाद से जुड़ी झड़पों में असम के 200 से अधिक लोगों की मौत: अधिकारी

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चार दशकों में अंतरराज्यीय सीमा विवाद से जुड़ी झड़पों में असम के 200 से अधिक लोगों की मौत: अधिकारी

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  • Publish Date - August 31, 2026 / 05:14 PM IST,
    Updated On - August 31, 2026 / 05:14 PM IST

गुवाहाटी, 31 अगस्त (भाषा) करीब चार दशकों में सीमा विवाद को लेकर पड़ोसी राज्यों के निवासियों के साथ हुई झड़पों में असम के 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम का असम के साथ सीमा विवाद है। इन राज्यों को 1960 और 1970 के दशक में असम से अलग करके बनाया गया था।

राज्य के सीमा सुरक्षा एवं विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सीमा निर्धारण को लेकर लंबे समय से विवादों के कारण असम की अंतरराज्यीय सीमाओं पर नियमित अंतराल पर झड़पें होती रही हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवादित क्षेत्रों में केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई आर्थिक गतिविधियां, जिनसे दोनों पक्षों के लोगों को लाभ मिले, लोगों की तीखी भावनाओं को शांत करने और संभावित झड़पों को रोकने में मदद कर सकती हैं।

असम पुलिस के सीमा संगठन के दस्तावेजों का हवाला देते हुए अधिकारी ने बताया कि वर्ष 1989 से अब तक मेघालय, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से लगी अंतरराज्यीय सीमाओं पर हुई झड़पों में असम के कुल 202 लोगों की मौत हुई है।

उन्होंने पहचान जाहिर नहीं करने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग, कार्बी आंगलोंग, गोलाघाट, कछार, जोरहाट, बिस्वनाथ, धेमाजी और कामरूप जिलों में लोगों की मौत हुई है।’’

असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीमा विवाद को लेकर हुई झड़पों में सबसे अधिक 142 लोगों की मौत गोलाघाट में हुई। इसके बाद कछार में 34 और बिस्वनाथ में 15 लोगों की जान गई।

सीमा पर हालिया झड़पों में 10 अगस्त को धेमाजी जिले में अंतरराज्यीय सीमा के पास भूमि अतिक्रमण को लेकर अरुणाचल प्रदेश के कथित उपद्रवियों की ओर से की गई गोलीबारी में असम के कम से कम 12 लोग घायल हो गए।

असम सरकार ने 29 जुलाई को राज्य विधानसभा को बताया कि उसकी करीब 83,000 हेक्टेयर जमीन पर वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय और मिजोरम का कब्जा है।

असम के पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक पल्लब भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ज्यादातर विवाद संबंधित राज्यों के लोगों को विश्वास में लिए बिना सीमाओं के गलत तरीके से निर्धारण किए जाने के कारण पैदा हुए।

उन्होंने कहा, ‘‘तेलंगाना को 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग करके बनाया गया, लेकिन दोनों राज्यों के बीच इस तरह का कोई सीमा विवाद नहीं है। इसकी वजह यह है कि लोगों को सीमा के बारे में जानकारी दी गई थी और वे इससे सहमत थे। पूर्वोत्तर में राज्यों के गठन के समय इस तरह की पहल नहीं की गई थी।’’

ऐसी जानलेवा झड़पों से बचने के लिए आगे का रास्ता पूछे जाने पर भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘आर्थिक विकास हमेशा मदद करता है। ऐसे विवादित क्षेत्रों में दोनों पक्षों के स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ केंद्र सरकार के नेतृत्व में आर्थिक गतिविधियां शुरू की जानी चाहिए।’’

भाषा आशीष माधव

माधव