नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने मंगलवार को आरोप लगाया कि 2021 से संसद में उनके द्वारा पूछे गए करीब 200 सवालों को अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इन सवालों में आतंकवादी हमलों, आईटी क्षेत्र में नौकरियों के नुकसान और घृणा अपराधों समेत कई मुद्दे शामिल थे।
ओ’ब्रायन के ये आरोप कांग्रेस के वरिष्ठ सांसदों मनीष तिवारी और विवेक तन्खा के उस दावे के एक दिन बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके उठाए गए सवालों को भी अक्सर नामंज़ूर कर दिया गया।
ओ’ब्रायन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इसे ‘‘संसद के अंदर और बाहर सेंसरशिप’’ बताया। तृणमूल नेता ने डिजिटल संसद वेबसाइट पर अपने सदस्य पोर्टल का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें ‘अस्वीकृत’ श्रेणी के तहत 207 प्रविष्टियां दिखाई गई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मार्च से जुलाई के बीच केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को हर मिनट ‘ब्लॉक’ का एक आदेश भेजा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘संसद में मेरे पूछे गए 200 से अधिक सवालों को अनुमति नहीं दी गई। इन सवालों में आतंकवादी हमलों, आईटी क्षेत्र में नौकरियों के नुकसान से लेकर घृणा अपराधों तक के मुद्दे शामिल थे।’’
तृणमूल नेता द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय से ‘केंद्रीय और राज्य सूचना आयोगों में निस्तारण दर’ को लेकर पूछे गए सवाल दिखाए गए।
इसमें दिखाया गया कि इस सवाल को नियम 47(2)(आई) के तहत यह कहते हुए अनुमति नहीं दी गई कि प्रश्न स्पष्ट, विशिष्ट और एक ही मुद्दे तक सीमित होना चाहिए।
इसके अलावा, संचार मंत्रालय से ‘सिम बाइंडिंग निर्देशों’ और गृह मंत्रालय से 2025 के दिल्ली लाल किले विस्फोट को लेकर पूछे गए सवालों को भी नियम 47(2)(22) के तहत अनुमति नहीं दी गई। इसके लिए कहा गया कि ऐसे मामलों से जुड़ी जानकारी नहीं मांगनी चाहिए, जो गोपनीय प्रकृति के हों।
गृह मंत्रालय से ‘एनएचआरसी के दर्जे में गिरावट’ को लेकर पूछे गए एक सवाल को भी नियम 47(2)(18) और 47(2)(22) के तहत अनुमति नहीं दी गई। इस पर टिप्पणी की गई कि ऐसे मामलों को नहीं उठाना चाहिए, जो ऐसे निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण में हों, जो मुख्य रूप से भारत सरकार के प्रति उत्तरदायी न हों। साथ ही, सवाल में ऐसे मामलों से संबंधित जानकारी नहीं मांगनी चाहिए, जो गोपनीय प्रकृति के हों।
गृह मंत्रालय से ‘वैश्विक लोकतंत्र रैंकिंग’ को लेकर पूछे गए एक सवाल को नियम 47(2)(चार) और 47(2)(12) के तहत अनुमति नहीं दी गई। इस पर कहा गया कि सवाल में तर्क, निष्कर्ष, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्तियां, आरोप, विशेषण या मानहानिकारक बयान नहीं होने चाहिए। साथ ही, सवाल में ऐसी व्यापक नीतिगत बातें भी नहीं उठाई जानी चाहिए, जिनका जवाब सवाल की निर्धारित सीमा में देना संभव न हो।
चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को दावा किया कि सितंबर 2020 से अगस्त 2025 के बीच उनके पूछे गए 120 से अधिक सवालों को अनुमति नहीं दी गई।
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने भी कहा कि उन्होंने मौजूदा सत्र के दौरान राज्यसभा में करीब 90 सवाल पूछे थे, लेकिन 10 से भी कम सवालों के जवाब मिले।
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने रविवार को आरोप लगाया कि युवाओं के प्रदर्शनों को लेकर द्रमुक के लोकसभा सदस्य वी. एस. मथेश्वरन द्वारा दिए गए तीन सेट सवालों को भी मानसून सत्र के दौरान अनुमति नहीं दी गई।
कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि इन सवालों में नीट-यूजी 2026 के आवेदन शुल्क की वापसी, सरकार के प्रति जनता के अविश्वास, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को उपलब्ध कराई गई सुविधाओं, प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं के साथ सरकार की बातचीत, छात्र कल्याण, प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा सुधार तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले लोगों के साथ किए जाने वाले व्यवहार जैसे मुद्दों पर जानकारी मांगी गई थी।
भाषा आशीष मनीषा
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