संसदीय समिति ने लद्दाख के उपराज्यपाल से मुलाकात की, क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की

संसदीय समिति ने लद्दाख के उपराज्यपाल से मुलाकात की, क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की

संसदीय समिति ने लद्दाख के उपराज्यपाल से मुलाकात की, क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की
Modified Date: June 26, 2026 / 02:53 pm IST
Published Date: June 26, 2026 2:53 pm IST

लेह/जम्मू, 26 जून (भाषा) संसद की विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति के सदस्यों ने लद्दाख के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना से मुलाकात कर पर्यावरण संबंधी चिंताओं, जल संकट और सीमा सुरक्षा समेत क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति ने बृहस्पतिवार को उपराज्यपाल से मुलाकात की। यह समिति रणनीतिक सीमा सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने के लिए जम्मू कश्मीर और लद्दाख के चार दिवसीय दौरे पर है जिसकी शुरुआत सोमवार को हुई थी।

उपराज्यपाल सक्सेना ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘लद्दाख दौरे के दौरान सांसद डॉ. शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसद की विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति के साथ सार्थक और उपयोगी बातचीत हुई।’’

उपराज्यपाल के अनुसार, समिति ने लद्दाख की प्रमुख चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी मांगी।

सक्सेना ने बताया कि उन्होंने समिति को लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र, पर्यावरणीय चुनौतियों और क्षेत्र में बढ़ते जल संकट के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने समिति को ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’, ‘सिंधु जल समृद्धि अभियान’ के तहत रॉक चेक बांधों के निर्माण तथा इन चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियान जैसी पहलों से भी अवगत कराया।

उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘समिति ने इन प्रयासों की सराहना की और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।’’

यह संसदीय समिति भारत-चीन संबंधों, भारत-पाकिस्तान संबंधों तथा सीमाओं पर समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र का दौरा कर रही है।

अपने दौरे पर समिति ने जम्मू, श्रीनगर, कारगिल और लेह का भ्रमण किया, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके।

इस महीने की शुरुआत में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्य भी लेह गए थे, जहां उन्होंने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और इस केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों की शिकायतें सुनी थीं।

भाषा गोला नरेश

नरेश


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