संसदीय समिति ने विदेशों में भारतीय मिशन की तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की सिफारिश की
संसदीय समिति ने विदेशों में भारतीय मिशन की तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की सिफारिश की
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाए जाने की बढ़ती घटनाओं के बीच, एक संसदीय समिति ने केंद्र सरकार से सिफ़ारिश की है कि वह विदेशों में स्थित भारतीय मिशन की सुरक्षा के लिए बजट में एक विशिष्ट उप-मद बनाए और उनका ‘तत्काल सुरक्षा ऑडिट’ करवाए।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय समिति की यह टिप्पणी खासा मायने रखती है, जो पश्चिम एशिया संकट और दुनिया भर में कई अन्य क्षेत्रीय संघर्षों के बीच आई है।
मंगलवार को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में, समिति ने ‘‘गंभीर चिंता’’ जताते हुए इस बात का संज्ञान लिया कि विदेश मंत्रालय के पास विदेशों में स्थित अपने 219 मिशन और चौकियों की सुरक्षा के लिए ‘कोई विशिष्ट बजट मद नहीं है’, और सुरक्षा पर होने वाला खर्च सामान्य मदों से पूरा किया जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कई संघर्ष क्षेत्रों और दुनिया भर में राजनयिक परिसरों को निशाना बनाए जाने की बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में, समिति ने पुरजोर सिफारिश की है कि मंत्रालय ‘मिशन सुरक्षा’ के लिए बजट में एक विशिष्ट उप-मद बनाए, जिसमें एक व्यापक ख़तरे के आकलन के आधार पर एक विशिष्ट वार्षिक आवंटन किया जाए।’’
समिति ने ‘‘सभी भारतीय मिशन की तत्काल सुरक्षा ऑडिट’’ कराने की सिफ़ारिश की है, जिसमें ज़्यादा जोखिम वाले स्थानों को प्राथमिकता दी जाए, और साथ ही एक समय-सीमा के भीतर सुरक्षा बढ़ाने की योजना भी बनाई जाए।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों पर विदेश मामलों की समिति की बारहवीं रिपोर्ट (2025-26) में 62 सिफ़ारिशें शामिल हैं, जो बजट आवंटन से लेकर पासपोर्ट सुविधाओं तक के विषयों से संबंधित हैं।
इस रिपोर्ट में भारत द्वारा अपने कई पड़ोसी देशों को दी जाने वाली सहायता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘’बांग्लादेश को सहायता’ उप-शीर्ष के तहत किए गए बजट आवंटन को 2025-26 के 120 करोड़ रुपये से घटाकर 2026-27 में 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
मंत्रालय ने बताया है कि ऐसा जुलाई-अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश में हुई राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी अशांति के कारण हुआ, जिसके चलते अनुदान परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हुई और वित्त वर्ष 2025-26 में कोई नयी परियोजना की प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की गई है।’’
समिति ने पेरिस और वॉशिंगटन में भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों की स्थिति पर भी गौर किया है।
भाषा वैभव सुभाष
सुभाष

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