संसदीय समिति ने एनटीए से कहा: नीट पुन:परीक्षा को साफ-सुथरे तरीके से कराया जाए

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संसदीय समिति ने एनटीए से कहा: नीट पुन:परीक्षा को साफ-सुथरे तरीके से कराया जाए

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 08:13 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 08:13 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने सोमवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि 21 जून को ‘नीट-यूजी’ की पुन:परीक्षा का आयोजन पारदर्शी और साफ-सुथरे तरीके से हो।

नीट और सीयूईटी की परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े विवादों के बीच, एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और शिक्षा मंत्रालय के कुछ अन्य अधिकारी शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति के समक्ष उपस्थित हुए।

देश में कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) बनाम कलम एवं कागज वाली परीक्षा प्रणाली के गुण एवं दोष पर चर्चा करने के लिए समिति द्वारा बैठक आयोजित की गई थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं।

सूत्रों का कहना था कि समिति ने यह उम्मीद जताई कि पेपर की लीक जैसी अनियमितता अब नहीं होगी तथा उसने एनटीए अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि 21 जून को नीट पुन:पुरीक्षा का आयोजन पारदर्शी तथा साफ-सुथरे तरीके से हो।

दिग्विजय सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में एक समाचार पोर्टल उस खबर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जिसमें कहा गया है कि उन्होंने समिति की बैठक में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ‘सिस्टम’ पर भरोसा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक बात जानता हूं कि धर्मेंद्र प्रधान के निकम्मेपन से प्रधानमंत्री इतने दुखी हैं कि उन्होंने अब सारी जिम्मेदारी खुद ले ली है। इसलिए पूरी जवाबदेही उनकी है। हमें पूरा भरोसा है कि यह (परीक्षा) ठीक तरह से होगी। अगर यहां भी लीक हो जाता है तो फिर हमें प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगना पड़ेगा।’’

सिंह ने समाचार पोर्टल की खबर के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘उसका क्या स्रोत है? प्रधानमंत्री जी ने 21 जून को फिर से होने वाली नीट की परीक्षा के सफलतापूर्वक आयोजन की जिम्मेदारी ली है या नहीं ली है? उन्होंने यह जिम्मेदारी ली है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि कम से कम उनके तहत यह पेपर लीक तो न हो। अगर उनकी जिम्मेदारी में पेपर लीक होता है तो उनसे इस्तीफा मांगना पड़ेगा।’’

उनका यह भी कहना था कि वह समिति की बैठक के अंदर उठाए गए किसी विषय पर बात नहीं करना चाहते।

उन्होंने यह भी कहा कि वह प्रयास करेंगे कि 21 जून तक वह समिति की रिपोर्ट सौंप दें। 21 जून को राज्यसभा की सदस्यता का उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि किसी भी समझदार व्यक्ति के लिए प्रधानमंत्री और उनके ‘सिस्टम’ पर विश्वास करना असंभव है।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री या उनके ‘सिस्टम’ को कोई क्लीन चिट नहीं दी है और दिग्विजय सिंह ने उन पर अपना विश्वास व्यक्त नहीं किया है। अंग्रेजी भाषा की एक मीडिया रिपोर्ट सूत्रों के आधार पर शरारतपूर्ण खबरें फैला रही है जिनका एजेंडा सिर्फ गुमराह करना है।’’

उनके मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा है कि हमें सॉलिसिटर जनरल द्वारा सूचित किया गया है कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से नीट की फिर से होने वाली परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं तथा अपने छात्रों की खातिर, हमें विश्वास करना चाहिए कि परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि एनटीए के अधिकारियों ने समिति को बताया कि वे वर्ष 2027 से सीबीटी प्रारूप में नीट परीक्षा आयोजित करने का इरादा रखते हैं, लेकिन वर्तमान में कलम एवं कागज के प्रारूप में पुन:परीक्षा आयोजित किया जाना है।

एनटीए ने पहले उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि परीक्षा सुरक्षा बढ़ाने के लिए एनईईटी-यूजी 2027 में सीबीटी प्रारूप में बदलाव करेगा। कंप्यूटर-आधारित परीक्षण में परिवर्तन की सिफारिश एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई थी।

शिक्षा मंत्रालय के सचिव (उच्च शिक्षा) विनीत जोशी और सचिव (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) पुण्य सलिल श्रीवास्तव को समिति ने सोमवार को कलम और कागज और सीबीटी प्रणालियों के फायदे और नुकसान पर चर्चा करने के लिए बुलाया था।

सीबीएसई परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के उपयोग और तकनीकी गड़बड़ियों के मद्देनजर छात्रों के सामने आने वाली समस्याओं की समीक्षा के लिए समिति मंगलवार को फिर से बैठक करेगी।

इससे पहले, उच्च शिक्षा सचिव, सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद और शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद के शीर्ष अधिकारी शुक्रवार को सरकारी आश्वासनों पर संसदीय समिति के सामने पेश हुए थे।

अनियमितता के आरोपों के चलते नीट-यूजी की परीक्षा अब 21 जून को फिर से आयोजित की जाएगी। इससे पहले तीन मई को परीक्षा का आयोजन हुआ था।

भाषा हक हक नरेश

नरेश