Reported By: Rajesh Raj
,रायपुर। Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ मंत्रालय में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी फाइलों के निपटारे की रफ्तार अब पूरी तरह निगरानी के दायरे में आ गई है। किस विभाग ने फाइलों का सबसे तेज निराकरण किया और किस विभाग ने सबसे अधिक समय लिया, इसकी जून माह की रैंकिंग रिपोर्ट जारी की गई है। फाइल स्कोर और रिस्पॉन्स टाइम के आधार पर तैयार रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग पहले स्थान पर रहा है, जबकि ऊर्जा विभाग सबसे पीछे है।
रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने एक फाइल के निराकरण में औसतन 6 घंटे 28 मिनट का समय लिया, जिससे वह रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचा। दूसरे स्थान पर गृह विभाग रहा, जहां औसतन 11 घंटे 18 मिनट में फाइलों का निराकरण किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तीसरे स्थान पर रहा, जहां औसतन 9 घंटे 31 मिनट में फाइलें निपटाई गईं। हालांकि ग्रामीण उद्योग और वाणिज्य एवं उद्योग विभाग का औसत समय अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन फाइल स्कोर कम होने के कारण उनकी रैंकिंग नीचे रही।
Chhattisgarh News: रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि वित्त, राजस्व, कृषि, कौशल विकास, सहकारिता, पशुधन विकास और सामान्य प्रशासन जैसे विभाग औसतन एक दिन 10 घंटे के भीतर फाइलों का निराकरण कर रहे हैं। वहीं कुछ विभागों में फाइलों के निपटारे की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। विधि विभाग में एक फाइल के निपटारे में औसतन 3 दिन 4 घंटे, जल संसाधन विभाग में 3 दिन 3 घंटे तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में 4 दिन 6 घंटे का समय लगा। सबसे अधिक समय ऊर्जा विभाग ने लिया, जहां एक फाइल के निपटारे में औसतन 6 दिन 29 मिनट लगे।
फाइलों की संख्या के लिहाज से सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी-ए एवं जीएडी-आर) सबसे आगे रहा। विभाग ने जून माह में 13 हजार से अधिक फाइलों का निराकरण किया। वित्त विभाग 12,375 फाइलों के साथ दूसरे और नगरीय प्रशासन विभाग 11,588 फाइलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा विधि विभाग ने भी क्रमशः 7 हजार और 6 हजार से अधिक फाइलों का निपटारा किया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष स्थान पर रहने को विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली से कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है तथा समयबद्ध तरीके से फाइलों का निराकरण सुनिश्चित हो रहा है।
हालांकि मंत्रालय कर्मचारी संघ ने रैंकिंग प्रणाली पर कुछ सवाल भी उठाए हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि किसी भी फाइल की प्रक्रिया जूनियर असिस्टेंट, सीनियर असिस्टेंट और असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर स्तर से शुरू होती है, लेकिन रैंकिंग तैयार करते समय इन स्तरों पर लगने वाले समय को शामिल नहीं किया गया है। उनका मानना है कि इससे विभागों के वास्तविक प्रदर्शन का पूरा आकलन नहीं हो पाता। ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने के बाद मंत्रालय के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है और अब विभागों के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन संभव हो रहा है। हालांकि कर्मचारी संगठनों की आपत्तियों के बीच इस व्यवस्था में आगे और सुधार की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।