संसदीय समिति की सिफारिश : दिल्ली पुलिस लापता लोगों पर अध्ययन करे, ताकि पता लगाना आसान हो
संसदीय समिति की सिफारिश : दिल्ली पुलिस लापता लोगों पर अध्ययन करे, ताकि पता लगाना आसान हो
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि दिल्ली पुलिस लापता व्यक्तियों के मामलों पर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर अध्ययन करे, ताकि नीति निर्माण, रोकथाम रणनीतियाँ और पता लगाने की प्रणाली में सुधार हो सके।
संसद के दोनों सदनों में पेश रिपोर्ट में, गृह मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने कहा कि लापता व्यक्तियों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और संवेदनशील व्यक्तियों से संबंधित मामलों का दिल्ली जैसे महानगर में ‘‘महत्वपूर्ण सामाजिक और सुरक्षा आयाम’’ है।
भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल की अगुवाई वाली समिति का मानना है कि ऐसे मामलों के सामाजिक-आर्थिक, जनसांख्यिकीय और व्यवहार संबंधी कारकों को समझने के लिए डेटा-आधारित और शोध-उन्मुख दृष्टिकोण आवश्यक है।
समिति की 257वीं रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘इसलिए समिति सिफारिश करती है कि दिल्ली पुलिस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से लापता व्यक्तियों के मामलों के तरीके और मूल कारणों का विश्लेषण करने के लिए व्यापक अध्ययन करे।’’
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अध्ययन में दिल्ली के लापता लोगों के मामलों की दर की तुलना अन्य भारतीय महानगरों और चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय शहरों के आंकड़ों से करना चाहिए, ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रणालीगत अंतर को पहचाना जा सके।
इस रिपोर्ट में समिति ने कहा है ‘‘ऐसे अध्ययन के निष्कर्ष नीति निर्माण, रोकथाम रणनीति, पता लगाने की प्रणाली में सुधार और सामुदायिक हस्तक्षेप के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।’’
समिति ने दिल्ली पुलिस से यह भी कहा कि महिला कर्मियों की संख्या को कुल स्वीकृत शक्ति का कम से कम 33 प्रतिशत करने के लिए चरणबद्ध और समयबद्ध रूपरेखा तैयार की जाए।
रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘महिला कर्मियों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना लैंगिक दृष्टि से संवेदनशील पुलिसिंग को बढ़ावा देने, सार्वजनिक विश्वास सुधारने और महिलाओं तथा संवेदनशील वर्गों के खिलाफ अपराधों पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए आवश्यक है।’’
समिति ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आबादी विविधतापूर्ण और घनी है जिसे देखते हुए सभी स्तरों पर महिला कर्मियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाली सशक्त और संतुलित बल संरचना की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में समिति ने नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का भी सुझाव दिया और कहा ‘‘अधिकतर नागरिक पुलिस थाने जाने में हिचकिचाते हैं और यह हिचकिचाहट पहुंच की कमी, पारदर्शिता का अभाव और कर्मियों के साथ संवाद में असुविधा जैसी धारणाओं से उत्पन्न होती है।’’
समिति ने कहा ‘‘ऐसी बाधाएँ अपराध की रिपोर्टिंग को हतोत्साहित कर सकती हैं, सामुदायिक भागीदारी कमजोर कर सकती हैं और कानून प्रवर्तन में विश्वास को कम कर सकती हैं।’’
समिति ने सुझाव दिया कि पुलिस थानों में विशेष ‘‘वन स्टॉप सिटिजन सर्विस डेस्क’’ स्थापित किए जाएँ, जिससे नागरिकों को पूछताछ और रिपोर्टिंग प्रक्रिया में मदद मिले; स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क और बाद की कार्रवाई के लिए ‘‘सामुदायिक अधिकारी’’ तैनात किए जाएँ; और महिलाओं, बच्चों तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए निजी और सहायक स्थान प्रदान करने हेतु पीड़ित सहयोग केंद्र बनाए जाएँ।
भाषा
मनीषा अविनाश
अविनाश

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