पासपोर्ट कभी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा: सरकारी सूत्र

पासपोर्ट कभी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा: सरकारी सूत्र

पासपोर्ट कभी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा: सरकारी सूत्र
Modified Date: June 25, 2026 / 01:50 pm IST
Published Date: June 25, 2026 1:50 pm IST

नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का सबूत नहीं रहा है और मोदी सरकार ने पिछले 12 सालों में इस दस्तावेज़ को लेकर कोई नया फ़ैसला नहीं लिया है। सरकार के सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।

पासपोर्ट को यात्रा दस्तावेज बताने और नागरिकता का सबूत नहीं होने की बात कहने संबंधी विदेश मंत्रालय के बयान पर मीडिया में आईं खबरों को लेकर सूत्रों ने कहा कि यह कल तय नहीं किया गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है।

सूत्रों ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार, गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट दिया जा सकता है।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘यह कल तय नहीं किया गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है। पिछले 12 सालों में भी ऐसा कोई फ़ैसला नहीं लिया गया। पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा है।’’

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से खबरों में कहा गया कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं। उन्होंने कहा कि यह ऐसा दस्तावेज नहीं है जो नागरिकता साबित करता हो।

तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर सरकार पर तंज कसा।

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि आज भारतीय नागरिकता का एकमात्र सबूत हिंदू और भाजपा का मतदाता होना है। इसके अलावा और कुछ नहीं चलेगा।’’

राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने भी इस मामले पर सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का साक्ष्य है? बीएलओ मेरी नागरिकता पर शक कर सकता है, मुझे वोट देने से रोक सकता है। नतीजा : भाजपा चुनाव जीत जाती है।’’

गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण को ‘‘बेतुका’’ बताया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं। सच में??? तो क्या वे कुछ लोगों को यह यात्रा दस्तावेज पूरी तरह आश्वस्त हुए बिना दे रहे हैं कि यह व्यक्ति भारतीय नागरिक है?? यह बेतुका है।’’

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बंबई उच्च न्यायालय के 2013 के फैसलों से यह साफ हो गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है।

निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सुनवाई के दौरान, उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है, बल्कि सिर्फ पहचान का दस्तावेज है।

भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने 20 दिसंबर 2019 को, राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) के जरिए विस्तृत जानकारी जारी की थी।

इसमें कहा गया है, ‘‘जन्म की तारीख और जन्म स्थान से जुड़े कोई भी दस्तावेज जमा करके नागरिकता साबित की जा सकती है। हालांकि, ऐसे स्वीकार्य दस्तावेजों पर अभी फैसला लिया जाना बाकी है।’’

पीआईबी ने ‘एफएक्यू’ में यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता का फैसला ‘नागरिकता नियम, 2009’ के आधार पर किया जाता है। ये नियम ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ पर आधारित हैं।

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा


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