अरुणाचल की वांचो लोककथा पर बनेगी पटकाई पर्वतमाला की पहली एनिमेटेड फिल्म

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अरुणाचल की वांचो लोककथा पर बनेगी पटकाई पर्वतमाला की पहली एनिमेटेड फिल्म

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 12:21 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 12:21 PM IST

ईटानगर, नौ जुलाई (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले के वांचो समुदाय की एक पारंपरिक लोककथा पर आधारित एक लघु एनिमेटेड फिल्म बनाई जा रही है। भारत-म्यांमा सीमा के निकट स्थित दूरस्थ पटकाई पर्वतमाला के किसी स्वदेशी समुदाय की कहानी पर आधारित यह अपनी तरह की पहली एनिमेटेड फिल्म होगी।

भारतीय आदिवासी कला, संस्कृति और लोककथाओं को एनिमेशन तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए बढ़ावा देने और संरक्षित करने के उद्देश्य से स्थापित ब्रिटेन स्थित गैर-लाभकारी संस्था ‘आदिवासी आर्ट्स ट्रस्ट’ ने एक बयान में यह जानकारी दी।

बयान के अनुसार, फिल्म संबंधी कार्य बेंगलुरु स्थित एक संस्थान में आयोजित दो महीने की कार्यशाला के दौरान किया जा रहा है। यह कार्यशाला ‘आदिवासी आर्ट्स ट्रस्ट’ और ब्रिटेन के ‘ब्रायन गिनीज चैरिटेबल ट्रस्ट’ के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसमें डिजाइन के चार स्नातक छात्र और वांचो समुदाय के दो युवा कलाकार एनिमेशन संकाय सदस्य विजय पुनिया के मार्गदर्शन में भाग ले रहे हैं।

परियोजना की शुरुआत लोंगडिंग जिले के वांचो समुदाय के सबसे बड़े पारंपरिक गांवों में से एक कामहुआ नोकनू से हुई।

इसकी शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, जब ब्रिटेन के फिल्म निर्माता और सांस्कृतिक शोधकर्ता जोनाथन होप अपने पोस्ट-डॉक्टोरल शोध के तहत गांव पहुंचे और वहां के बुजुर्गों द्वारा सुनाई जाने वाली मौखिक लोककथाओं का दस्तावेजीकरण किया।

अध्ययन के दौरान कामहुआ नोकनू और आसपास के गांवों से 32 लोककथाएं दर्ज की गईं। स्थानीय विद्यालय के शिक्षक जाटवांग वांगसा ने इनका अनुवाद किया, जिन्हें वर्ष 2024 में पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया।

मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित इन लोककथाओं में समुदाय की मान्यताओं, रीति-रिवाजों और प्रकृति के साथ उसके संबंधों का चित्रण किया गया है।

परियोजना का दूसरा चरण वर्ष 2020 में शुरू हुआ, जब कामहुआ नोकनू में स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण और एनिमेशन से परिचित कराने के उद्देश्य से एक कार्यशाला आयोजित की गई।

जाटवांग वांगसा के पिता दिवंगत नगामचाई वांगसा द्वारा सुनाई गई इस लोककथा में पहले गांव प्रमुख माने जाने वाले वांगहाम की पौराणिक उत्पत्ति का वर्णन है। इसके साथ ही इसमें सामुदायिक जीवन, पारंपरिक कृषि, क्षेत्रीय विवाद, शासन व्यवस्था तथा मनुष्य और पर्यावरण के संबंध जैसे विषयों को भी प्रस्तुत किया गया है।

फिल्म पूरी होने पर इसे ‘स्टोरीज़ ऑफ आवर एन्सेस्टर्स’ श्रृंखला के तहत वांचो, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी मौखिक परंपराओं को एनिमेशन के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

भाषा मनीषा रंजन

रंजन