फिटनेस ट्रैकिंग के पांच छिपे खतरे, विशेषज्ञों ने सावधान किया

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फिटनेस ट्रैकिंग के पांच छिपे खतरे, विशेषज्ञों ने सावधान किया

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 12:58 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 12:58 PM IST

( सहर बक्र, नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी )

नॉटिंघम (ब्रिटेन), नौ जुलाई (द कन्वरसेशन) मोबाइल ऐप, स्मार्टवॉच और अन्य पहनने योग्य फिटनेस उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपकरण लोगों को अधिक सक्रिय जीवनशैली अपनाने में मदद करते हैं, लेकिन इन पर अत्यधिक निर्भरता मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह भी हो सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, फिटनेस ट्रैकर केवल शारीरिक गतिविधियों का रिकॉर्ड नहीं रखते, बल्कि लक्ष्य, अलर्ट, बैज, ‘स्ट्रीक’ और स्वचालित फीडबैक के जरिए लोगों के व्यवहार को भी प्रभावित करते हैं। जहां ये कुछ लोगों को अधिक सक्रिय बनने के लिए प्रेरित करते हैं, वहीं कई लोगों में चिंता, अपराधबोध, तनाव और खान-पान संबंधी अस्वास्थ्यकर व्यवहार भी देखने को मिला है।

पिछले एक दशक से इस विषय पर शोध कर रहे विशेषज्ञ ने फिटनेस ट्रैकिंग से जुड़े पांच प्रमुख जोखिमों की पहचान की है।

विशेषज्ञ के अनुसार, पहला खतरा प्रतिदिन 10,000 कदम चलने के लक्ष्य को लेकर है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य 1960 के दशक में जापान में एक पेडोमीटर के प्रचार अभियान से जुड़ा था और इसे सभी लोगों के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मानक नहीं माना जाता। कई शोध बताते हैं कि अधिकतर वयस्कों के लिए लगभग 7,000 कदम भी पर्याप्त और अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सभी लोगों के लिए एक समान लक्ष्य तय करना उचित नहीं है। इसके अलावा फिटनेस ट्रैकर अक्सर केवल उन्हीं गतिविधियों को सही ढंग से दर्ज कर पाते हैं जिन्हें वे आसानी से माप सकते हैं। साइकिल चलाना, तैराकी, शक्ति प्रशिक्षण, पुनर्वास संबंधी व्यायाम और शरीर के लचीलेपन से जुड़ी गतिविधियां कई बार पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं हो पातीं। इससे लोगों में यह गलत धारणा बन सकती है कि केवल कदमों की संख्या ही स्वास्थ्य का पैमाना है।

विशेषज्ञ के अनुसार, दूसरा खतरा यह है कि व्यायाम धीरे-धीरे आनंद लेने के बजाय लक्ष्य पूरा करने का माध्यम बन जाता है। उनका कहना है कि यदि पूरा ध्यान केवल लक्ष्य या ‘रिंग’ पूरा करने पर केंद्रित हो जाए तो शारीरिक गतिविधि बोझ लगने लगती है। शोध बताते हैं कि जो लोग बार-बार लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते, वे अक्सर न केवल फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल छोड़ देते हैं बल्कि नियमित व्यायाम भी बंद कर देते हैं। इसके विपरीत, आनंद के लिए की गई गतिविधियां लंबे समय तक जारी रहती हैं।

तीसरा जोखिम यह है कि अधिकतर उपकरण अधिक गतिविधि को ही सफलता का संकेत मानते हैं। लगातार आने वाले संदेश और आंकड़े उपयोगकर्ताओं पर अधिक व्यायाम करने का दबाव डालते हैं, जबकि व्यक्ति की उम्र, शारीरिक क्षमता, बीमारी से उबरने की स्थिति, चोट, गर्भावस्था या नींद जैसी परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग अपने शरीर के संकेतों के बजाय उपकरण द्वारा दिए गए आंकड़ों पर अधिक भरोसा करने लगते हैं, जबकि उपकरण के पास व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी नहीं होती।

चौथा खतरा यह है कि इन उपकरणों को अक्सर एक ‘औसत’ उपयोगकर्ता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है, जबकि वास्तविकता में सभी लोगों की शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य, अनुभव और लक्ष्य अलग-अलग होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई उपकरणों में ऐसे मानक शामिल होते हैं जो सक्षम शरीर वाले, नियमित व्यायाम करने वाले लोगों के लिए अधिक उपयुक्त हैं। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) जैसे मानकों की भी आलोचना होती रही है क्योंकि वे कई बार मांसल शरीर वाले या पूरी तरह स्वस्थ लोगों का सही आकलन नहीं कर पाते। ऐसे पूर्वनिर्धारित मानक कुछ लोगों को जरूरत से अधिक व्यायाम करने या कम भोजन करने जैसी अस्वास्थ्यकर आदतों की ओर भी धकेल सकते हैं।

पांचवां जोखिम यह है कि फिटनेस ट्रैकर शारीरिक निष्क्रियता को अक्सर व्यक्तिगत इच्छाशक्ति की कमी के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि सुरक्षित सड़कें, समय, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जिम्मेदारियां, दिव्यांगता, स्थानीय सुविधाएं और हरित क्षेत्र जैसी सामाजिक परिस्थितियां भी लोगों की सक्रियता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में लक्ष्य पूरा नहीं होने पर कई उपयोगकर्ताओं में अपराधबोध, निराशा और असफलता की भावना पैदा हो सकती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि लोग फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों से करते हैं। इसलिए इन उपकरणों में व्यक्तिगत जरूरतों, स्वास्थ्य, शारीरिक क्षमता और परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव किए जाने चाहिए।

उनके अनुसार, फिटनेस ट्रैकिंग को निर्देश के बजाय केवल जानकारी के स्रोत के रूप में देखना अधिक उचित होगा। स्मार्टवॉच यह बता सकती है कि उसने क्या दर्ज किया है, लेकिन यह तय नहीं कर सकती कि किसी व्यक्ति के शरीर को किसी दिन वास्तव में किस प्रकार की गतिविधि या आराम की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भविष्य में फिटनेस ट्रैकर इस तरह विकसित किए जाने चाहिए कि उनमें निश्चित कदमों के लक्ष्य पर कम जोर हो, शक्ति प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों को भी समान महत्व मिले, आराम और रिकवरी को नकारात्मक रूप में न दिखाया जाए तथा अलग-अलग आयु, शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य स्थिति और लक्ष्यों वाले लोगों के लिए अधिक सुरक्षित और व्यक्तिगत विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।

द कन्वरसेशन मनीषा नरेश

नरेश