जंतर-मंतर पर पिज्जा, बिरयानी और गोलगप्पों के साथ छात्रों के समर्थन में जुटे लोग

जंतर-मंतर पर पिज्जा, बिरयानी और गोलगप्पों के साथ छात्रों के समर्थन में जुटे लोग

जंतर-मंतर पर पिज्जा, बिरयानी और गोलगप्पों के साथ छात्रों के समर्थन में जुटे लोग
Modified Date: July 22, 2026 / 08:49 pm IST
Published Date: July 22, 2026 8:49 pm IST

(श्रुति भारद्वाज)

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) पिज्जा, बिरयानी, लंगर, फल और यहां तक कि गोलगप्पे भी जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में शामिल छात्रों के लिए जरूरी चीजों में शामिल हो गए हैं। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े स्वयंसेवक सैकड़ों छात्रों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र कथित ‘लीक’ मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर अब एक सामुदायिक रसोई में बदल गया है, जहां कार्यालय जाने वाले लोग, बुजुर्ग, बच्चे और सामुदायिक समूह कंधे से कंधा मिलाकर प्रदर्शनकारियों को भोजन, नाश्ता और पेय पदार्थ उपलब्ध करा रहे हैं।

खान-पान की सूची भी बड़ी संख्या में मौजूद युवा प्रदर्शनकारियों की पसंद को दर्शाता है। इसमें पिज्जा, बिरयानी, चिप्स, बिस्कुट, फलों के रस और ठंडे पेय शामिल हैं। वहीं स्थानीय विक्रेता प्रदर्शनकारियों को मुफ्त में गोलगप्पे और दही भल्ले भी उपलब्ध करा रहे हैं।

उमस भरे मौसम में प्रदर्शनकारियों को गर्मी से राहत देने के लिए कई भोजन पैकेटों में छोटे हाथ वाले पंखे भी रखे गए हैं।

मंगलवार को प्रदर्शन में शामिल हुए निहंग सिखों समेत सिख समुदाय ने बुधवार को भी लंगर जारी रखा, जिसमें आने वाले हर व्यक्ति को ताजा भोजन परोसा गया। कई बच्चे पानी की बोतलें बांटते नजर आए, जबकि बुजुर्ग स्वयंसेवक प्रदर्शन में शामिल लोगों को केले और मौसमी फल वितरित करते दिखे।

दिल्ली की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत रवि मौर्य छुट्टी लेकर स्वयंसेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर से और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की ओर से भी मदद पहुंच रही है। उन्होंने कहा, ‘अलग-अलग राज्यों के लोग भोजन और पीने का पानी भेज रहे हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीयों से भी योगदान मिल रहा है। हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार छात्रों की मदद करना चाहता है।’

मौर्य ने बताया कि तेज गर्मी में छात्रों को कई घंटे बैठे देखने के बाद स्वयंसेवकों ने भोजन के पैकेटों में हाथ वाले पंखे रखना शुरू किया। उन्होंने कहा, ‘यह छोटी-सी पहल हो सकती है, लेकिन हमें लगा कि हर पैकेट में ऐसी कोई चीज होनी चाहिए, जो थोड़ी राहत दे सके।’

नाश्ता बांटने वालों में नीट अभ्यर्थी ईशा भी शामिल थीं, जो एक साल का समय गंवा चुकी है और अपने चचेरे भाई के साथ स्वयंसेवा करने प्रदर्शन स्थल पर पहुंची है।

ईशा ने कहा, ‘हम छात्रों के सामने मौजूद अनिश्चितता को समझते हैं। हम अपनी ओर से किसी भी तरह योगदान देना चाहते थे और नाश्ता लाना उनका समर्थन करने का सबसे आसान तरीका लगा।’ ईशा ने बताया कि उन्होंने और उनके चचेरे भाई ने अपनी जेब खर्च की राशि बचाकर नाश्ता खरीदा।

फल बांट रही एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि वह छात्रों को अपने बच्चों की तरह देखती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि वे कुछ अच्छा खाएं। अगर वे घंटों यहां बैठे हैं तो कम से कम हम उनका ध्यान तो रख सकते हैं।’

पानी की बोतलें बांट रहे कॉलेज छात्र अमित ने कहा कि अलग-अलग लोग एक साझा उद्देश्य के लिए साथ आए हैं। उन्होंने कहा, ‘बहुत गर्मी है और कई छात्र सुबह से यहां मौजूद हैं। अगर किसी को पानी की एक बोतल देने से वह थोड़ी देर और यहां रह सकता है तो मेरे लिए यही पर्याप्त है।’

सोमवार को कॉजपा के नेतृत्व वाले ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर धरना जारी है। उस दिन मानसून सत्र के पहले दिन संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।

भाषा अमित रंजन

रंजन


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