बंगाल के लोग पसंद का भोजन करने को स्वतंत्र, भाजपा केवल खुले में बीफ की बिक्री के खिलाफ: भट्टाचार्य

बंगाल के लोग पसंद का भोजन करने को स्वतंत्र, भाजपा केवल खुले में बीफ की बिक्री के खिलाफ: भट्टाचार्य

बंगाल के लोग पसंद का भोजन करने को स्वतंत्र, भाजपा केवल खुले में बीफ की बिक्री के खिलाफ: भट्टाचार्य
Modified Date: February 19, 2026 / 08:04 pm IST
Published Date: February 19, 2026 8:04 pm IST

कोलकाता, 19 फरवरी (भाषा) बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के ‘‘खुले में मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध’’ संबंधी आरोपों को लेकर जारी राजनीतिक तकरार के बीच, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य के लोग अपनी पसंद का भोजन करने के लिए स्वतंत्र हैं और पार्टी केवल खुले में बीफ की बिक्री के खिलाफ है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बिहार सरकार के खुले में मांस की बिक्री को विनियमित करने संबंधी हालिया आदेश का उल्लेख करते हुए इसे मांसाहार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित कदम बताया।

भट्टाचार्य ने पड़ोसी राज्य बिहार में खुलेआम मछली और मांस की बिक्री पर प्रस्तावित प्रतिबंध लगाने संबंधी तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘बंगाल के लोग जो चाहेंगे, वही खाएंगे। बंगाल में मछली और मांस मिलता रहेगा।’’

बिहार के निर्देश पर विस्तार से बात करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा ने इस तरह के किसी भी व्यापक प्रतिबंध का प्रस्ताव नहीं रखा था। उन्होंने कहा, ‘‘वे कभी ऐसी बात कह ही नहीं सकते। क्यों कहें? कोई इसे स्वीकार नहीं करेगा। तृणमूल कांग्रेस इन टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।’’

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई प्रतिबंध लागू होता है तो बिहार या पश्चिम बंगाल में कोई भी इसका पालन नहीं करेगा और फिलहाल ऐसा कोई प्रतिबंध मौजूद नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का रुख केवल बीफ की खुलेआम बिक्री का विरोध करने तक ही सीमित है।

बिहार में मछली और मांस की बिक्री पर कथित प्रतिबंध के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने मंगलवार को छोटे व्यापारियों की आजीविका संबंधी चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया था।

उन्होंने कहा था, ‘‘मुझे बिहार के उपमुख्यमंत्री के इस कथन से संबंधित एक रिपोर्ट मिली है कि मछली और मांस खुले बाजार में नहीं बेचे जा सकते। यह जनविरोधी और निंदनीय है। क्या हर कोई शॉपिंग मॉल में मांस और मछली बेच सकता है? सड़क किनारे मछली और मांस बेचने वाले ज्यादातर विक्रेताओं का क्या होगा? उनकी आजीविका का क्या होगा? ऐसी राजनीति निंदनीय है।’’

भाषा

देवेंद्र वैभव

वैभव


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