नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें भारत में निजी एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले हवाई किराए और अन्य अतिरिक्त शुल्कों में होने वाले ‘‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’’ को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध किया गया है।
उच्चतम न्यायालय की सात सितंबर की वाद सूची के अनुसार, मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ करेगी।
केंद्र ने 17 अगस्त को शीर्ष न्यायालय को बताया था कि उसने भारत के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बनाए गए भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियम तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है और इन्हें तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
सरकार ने इन प्रस्तावित नियमों का मसौदा पीठ के समक्ष सीलबंद लिफाफे में रखा था और बताया था कि इस पर कुछ अंतिम स्तर की चर्चाएं चल रही हैं।
शीर्ष न्यायालय सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में पूरे नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की मांग की गई है। साथ ही, भारत में निजी एयरलाइनों द्वारा वसूले जाने वाले हवाई किराए और अन्य सहायक शुल्कों में होने वाले “अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव” को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय दिशानिर्देश बनाने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने अधिकारियों की ओर से ‘‘इच्छाशक्ति की कमी’’ और मौजूदा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि एयरलाइन यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं।
न्यायालय ने 15 मई को याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि हवाई किराए में कुछ हद तक युक्तिसंगत व्यवस्था होनी चाहिए और केंद्र से यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने को कहा था।
जनवरी में मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह हवाई किराए में होने वाले ‘‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’’ के मामले में हस्तक्षेप करेगी। न्यायालय ने त्योहारों के दौरान हवाई किराए में होने वाली अत्यधिक बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई थी।
भाषा गोला दिलीप
दिलीप