Petrol-Diesel Purchase Limit: अब सिर्फ इतने लीटर पेट्रोल खरीद पाएंगे वाहन चालक, डीजल के लिए भी तय हुई लिमिट, इन कंपनियों ने लिया बड़ा फैसला

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अब सिर्फ इतने लीटर पेट्रोल खरीद पाएंगे वाहन चालक, डीजल के लिए भी तय हुई लिमिट, Petrol-Diesel Purchase Limit Fixed Once Again in India

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 06:54 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 06:58 PM IST

नई दिल्ली। Petrol-Diesel Purchase Limit Fixed मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर एक बार फिर भारत में देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच घरेलू ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ गया है। इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी ने अपने कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री सीमित कर दी है। इसका उद्देश्य उपलब्धता बनाए रखना और थोक खरीद के जरिए ईंधन की जमाखोरी को रोकना बताया जा रहा है।

नायरा के पंप पर 30 लीटर पेट्रोल की सीमा (Petrol-Diesel Purchase Limit)

Petrol-Diesel Purchase Limit Fixed मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी ने अपने कुछ फ्यूल स्टेशनों पर पेट्रोल और डीजल की खरीद पर सीमा तय की है। इसके तहत ग्राहकों को एक बार में अधिकतम 30 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटिश पेट्रोलियम के संयुक्त उद्यम रिलायंस बीपी मोबिलिटी ने भी कुछ आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री सीमित की है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा मांग की स्थिति को देखते हुए ये कदम ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं। खासकर औद्योगिक और अन्य गैर-परिवहन क्षेत्रों से डीजल की मांग बढ़ने के बीच बिक्री पर यह सीमा लगाई गई है।

पहले भी लागू हो चुके हैं प्रतिबंध

रिलायंस बीपी इससे पहले भी अप्रैल में ईंधन की बिक्री पर इसी तरह के प्रतिबंध लगा चुका है। उस समय मध्य पूर्व में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। मौजूदा समय में भी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

मई से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है, वहीं भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम मई से स्थिर बने हुए हैं। निजी तेल कंपनियां खुदरा कीमत तय करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन सरकारी तेल विपणन कंपनियां आम तौर पर सरकार से परामर्श के बाद कीमतों में बदलाव करती हैं। निजी खुदरा विक्रेता भी बड़े पैमाने पर इसी मूल्य निर्धारण व्यवस्था का अनुसरण करते हैं। इधर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू स्तर पर खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं होने का असर ईंधन विक्रेताओं के मार्जिन पर पड़ा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में ICRA के अनुमान का हवाला देते हुए कहा गया है कि 9 सितंबर तक निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल की बिक्री पर करीब 5 रुपये और डीजल पर लगभग 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था।