सीबीएसई में ‘जेबकतरे’ बैठे हैं, सावधान रहने की जरूरत: राहुल

सीबीएसई में 'जेबकतरे' बैठे हैं, सावधान रहने की जरूरत: राहुल

सीबीएसई में ‘जेबकतरे’ बैठे हैं, सावधान रहने की जरूरत: राहुल
Modified Date: June 1, 2026 / 10:11 am IST
Published Date: June 1, 2026 10:11 am IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली की पृष्ठभूमि में सोमवार को दावा किया कि आज छात्र को अपनी ही उत्तर पुस्तिका की सही जांच के लिए 2000 रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है।

राहुल ने आरोप लगाया है कि सीबीएसई में ‘जेबकतरे’ बैठे हैं, जिनसे सावधान रहने की जरूरत है।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘जेबकतरों से सावधान, आज वो सीबीएसई के अंदर बैठे हैं। सीबीएसई की गलती से नंबर ग़लत आए तो आपको क्या मिलता है?’

उन्होंने कहा, ‘एक बिल है: इसमें प्रति विषय डिजिटल स्कैन कॉपी का खर्च 100 रुपये, फिर से टोटल करने का खर्च प्रति पेपर 100 रुपये और पुनर्मूल्यांकन का खर्च प्रति प्रश्न 25 रुपये है।’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अपनी ही उत्तर पुस्तिका की सही जांच के लिए एक बच्चे को 2000 रुपये तक भरने पड़ सकते हैं।

उनका कहना है, ‘सोचिए, जब चार लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डालें हैं तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा है। जब स्कैनिंग फ़ोन से हुई हो, ग़लत मार्किंग तय है। और उसे ठीक करवाने की क़ीमत बच्चा भर रहा है।गलती सीबीएसई की। सज़ा बच्चे की। कमाई सरकार की।’

राहुल गांधी ने दावा किया, ‘जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती, बढ़ाई जाती है। इसकी सबसे बड़ी क़ीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं, अपने समय से, अपने आत्मविश्वास से, और अपने भविष्य से।’

भाषा हक रंजन

रंजन

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