परिसीमन प्रक्रिया से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करवाने के लिए दो विधेयक लाने की योजना

परिसीमन प्रक्रिया से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करवाने के लिए दो विधेयक लाने की योजना

परिसीमन प्रक्रिया से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करवाने के लिए दो विधेयक लाने की योजना
Modified Date: March 23, 2026 / 10:49 pm IST
Published Date: March 23, 2026 10:49 pm IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) सरकार लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए संसद के मौजूदा बजट सत्र में दो विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आम सहमति पर पहुंचने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं।

सूत्रों ने बताया कि यदि आम सहमति बन जाती है, तो दोनों विधेयक इसी सप्ताह पेश किए जा सकते हैं।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान संविधान में संशोधन करके लाया गया था, लेकिन यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।

उपलब्ध व्यापक रूपरेखा के मुताबिक लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएगी, जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी। आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आवंटन के साथ ‘‘ऊर्ध्वाधर आधार’’ पर किया जाएगा।

राज्य विधानसभाओं के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जहां सीटों का आरक्षण आनुपातिक आधार पर किया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि जहां एक ओर संविधान संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के रूप में जाना जाता है, में बदलाव करेगा। वहीं, दूसरी ओर एक अन्य साधारण विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन करेगा।

संसद से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित कानून 31 मार्च, 2029 को लागू हो जाएंगे और लोकसभा के अलावा ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में सीट के आरक्षण में मदद करेंगे।

सूत्रों ने बताया कि परिसीमन या सीमा आयोग एक ‘निष्पक्ष’ निकाय है जिसे लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। इसके निर्णयों को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष निकाय परिसीमन प्रक्रिया में विश्वास पैदा करेगा। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन उसे अखिल भारतीय परिसीमन प्रक्रिया संचालित करने का दायित्व नहीं दिया जा सकता।

एक सरकारी पदाधिकारी ने बताया, ‘‘अधिक से अधिक, यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में परिसीमन किया था।’’

परिसीमन प्रक्रिया के अलावा, इसके द्वारा उन निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है जिन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाना है, जैसा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए किया जाता है (उनके मामलों में जनसंख्या के आधार पर)। इस प्रकार निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण का निर्धारण करने का एक अन्य तरीका ‘रोटेशन’ प्रक्रिया हो सकती है।

सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। इस कानून को आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है।

सूत्रों ने बताया कि यह अधिनियम अबतक लागू नहीं हुआ है, फिर भी सरकार की इच्छा होने पर और दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन मिलने पर संसद द्वारा एक अन्य संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से इसमें संशोधन किया जा सकता है।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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