नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर उनकी तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा के लिए बैठक करेंगे। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के साथ शुरू हुआ था। ईरान ने भी खाड़ी के अपने पड़ोसी देशों और इजराइल पर हमले कर जवाबी कार्रवाई की है।
सूत्रों ने बताया, ‘‘प्रधानमंत्री कल शाम वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मुख्यमंत्रियों के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष पर बातचीत करेंगे, ताकि राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जा सके। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा।’’
जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, उन राज्यों के मुख्यमंत्री, आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।
मंत्रिमंडल सचिवालय, चुनाव वाले राज्यों – तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ एक अलग बैठक करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने गत सोमवार को लोकसभा में कहा था कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए अप्रत्याशित संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है जिससे निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर वक्तव्य देते हुए यह भी कहा कि इस संकट का सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के हालात ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं जो आर्थिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सुरक्षा से जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज में संदेश दुनिया में जाए।’’
उसी दिन बाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के बाद से चुनौतियां लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। ऐसा कोई वर्ष नहीं बीता जिसने भारत और भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 1.4 अरब भारतीयों के एकजुट प्रयासों से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है।’’
भाषा वैभव रंजन
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