प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में ‘शौर्य यात्रा’ में भाग लिया, परेड में 108 घुड़सवारों की टुकड़ी शामिल हुई
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में 'शौर्य यात्रा' में भाग लिया, परेड में 108 घुड़सवारों की टुकड़ी शामिल हुई
(कुणाल दत्त)
सोमनाथ (गुजरात), 11 जनवरी (भाषा) सोमनाथ मंदिर की रविवार को निकाली गई शौर्य यात्रा में डमरू बजाते हुए व्यक्तियों का एक समूह और गुजरात के विभिन्न हिस्सों से लाए गए 108 अश्व शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक खुली छत वाली गाड़ी से इस भव्य यात्रा का अवलोकन किया।
यात्रा शंख सर्कल से शुरू हुई और प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर परिसर के सामने स्थित वीर हमीरजी गोहिल सर्कल की ओर लगभग एक किलोमीटर का सफर तय किया।
डमरू बजाते हुए पुरुषों का एक समूह शौर्य यात्रा का हिस्सा था और प्रधानमंत्री के वाहन के आगे क्रम से चल रहा था।
मोदी के हाथ में एक ढोल था, जिसे उन्होंने यात्रा की शुरुआत में थोड़ी देर बजाया और फिर सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया।
यात्रा के आगे बढ़ने पर दोनों ओर सड़कों पर जमा भीड़ ने जयकारे लगाए और कई लोगों ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं, जबकि कलाकारों ने यात्रा मार्ग पर नियमित अंतराल पर बने विभिन्न मंचों पर भारत के विभिन्न नृत्य रूपों का प्रदर्शन किया।
यात्रा में 108 घोड़ों का दल सबसे अलग दिख रहा था, जिनके सवारों ने सफेद कमीज के साथ खाकी पतलून और केसरिया रंग की टोपी पहन रखी थी।
भरत कुमार जटाभाई ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘ये घोड़े और इनके सवार गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए हैं। हम गुजरात पुलिस से हैं और हमने पिछले दस दिनों में इसका अभ्यास किया है। मैं पाटन जिले में तैनात एक कांस्टेबल हूं और इस शौर्य यात्रा का हिस्सा बनकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है।’
गुजरात पुलिस के कांस्टेबल ने बताया कि उसका घोड़ा 17 साल का है और काठियावाड़ी और मारवाड़ी संकर नस्ल का घोड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘पाटन जिले से लगभग दस घोड़े लाए गए हैं।’
प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर शनिवार शाम को यहां पहुंचे। उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के हिस्से के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम को देखा।
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शौर्य यात्रा में शामिल होकर अत्यंत गौरवान्वित हूं। इस अवसर पर मंदिर की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाली मां भारती की अनगिनत वीर संतानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनका अदम्य साहस और पराक्रम देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।”
भाषा नोमान वैभव
वैभव

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