पोखरण-2 परमाणु परीक्षण के 20 बरस, धमाकों की गूंज से दहला था दुश्मन देश

पोखरण-2 परमाणु परीक्षण के 20 बरस, धमाकों की गूंज से दहला था दुश्मन देश

पोखरण-2 परमाणु परीक्षण के 20 बरस, धमाकों की गूंज से दहला था दुश्मन देश
Modified Date: November 29, 2022 / 08:51 pm IST
Published Date: May 11, 2018 8:40 am IST

नई दिल्ली। पोखरण-2 परमाणु परीक्षण के आज 20 बरस हो गए। 11 मई 1998 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राजस्थान के जैसलमेर से 110 किलोमीटर दूर पोखरण इलाके में परमाणु परीक्षण कर भारत परमाणु शक्ति संपन्न देशों की सूची में शुमार हुआ था। 

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भारत ने परमाणु अप्रसार संधि में हस्ताक्षर किए बिना भारी दबाव के बीच इस सफल परीक्षण को पूरा किया था। भारत के इस कदम से अमेरिका, पाकिस्तान हैरान रह गए थे।     

पोखरण रेंज में पांच परमाणु के सफल परीक्षण के दौरान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी मिसाइल मैन अब्दुल कलाम के साथ पोखरण रेंज में मौजूद थे। परीक्षण के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐलान किया था कि हमने 15.35 को अंडर ग्राउंड परमाणु परीक्षण किया। मिसाइल मैन अब्दुल कलाम ने परीक्षण के सफल होने की पुष्टि की थी। अटल विहारी वाजपेयी ने कहा था कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं उन देशों पर भारत अपने हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा। 

गोपनीय रखा गया था मिशन

मिशन से जुड़ी हर बात और तथ्यों को बेहद गोपनीय रखा गया था। महत्वपूर्ण बातें कोड वर्ड्स में की जाती थी। मिशन को ऑपरेशन शक्ति का नाम दिया गया। और 10 मई की रात को इसे अंतिम रूप दिया गया।

पोखरण में आबादी बस्तियों से दूर रेतीले जगह पर कई फीट नीचे गड्ढा खोदा गया। तड़के सुबह परमाणु बमों को पोखरण पहुंचाया गया। बम दस्ते का नाम कोड वर्ड्स से लिया जाता था।

परमाणु बम को खोदे गए गड्ढों में डाला गया। और गड्ढों को रेत और मिट्टी से भरकर टीलो में तब्दील किया गया।  जब धमाका हुआ तो आसमान धूल से ढक गया था। नीचे कई फीट गहरे गड्ढे हो गए थे। 

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टीम में मिसाइल मैन अब्दुल कलाम भी सेना की वर्दी में थे। कलाम परीक्षण से पहले अकेले ही पोखरण रेंज में आकर टेस्ट करते थे ताकी किसी को भनक न लगे। परीक्षण के दिन वैज्ञानिकों की पूरी 20 सदस्यीय टीम सेना की वर्दी में पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी थी।

 

वेब डेस्क, IBC24

 


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