आरोपियों की गिरफ्तारी में चुनिंदा रवैया नहीं अपना सकती पुलिस: अदालत
आरोपियों की गिरफ्तारी में चुनिंदा रवैया नहीं अपना सकती पुलिस: अदालत
नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बच्ची की तस्करी के 2024 के मामले में मुख्य आरोपी बताई जा रही एक नर्स को गिरफ्तार नहीं किए जाने को लेकर पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में ‘‘चुनिंदा रवैया’’ नहीं अपना सकती।
न्यायमूर्ति गिरिश कठपालिया ने मामले में एक सह-आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अदालत राज्य की उस नीति को मंजूरी नहीं दे सकती जिसमें केवल कुछ आरोपियों को चुनिंदा तरीके से गिरफ्तार किया जाए।
मामले में मौजूदा याचिकाकर्ता ने एक अन्य आरोपी के साथ कथित तौर पर पति-पत्नी बनकर एक नवजात बच्ची को गोद लिया था। बाद में बच्ची को एक अन्य सह-आरोपी को बेच दिया गया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और मुख्य आरोपी नर्स कुलविंदर कौर को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अदालत ने 31 अगस्त को पारित आदेश में कहा, ‘‘राज्य द्वारा कुछ आरोपियों को चुनिंदा तरीके से गिरफ्तार करने की नीति को मंजूर नहीं किया जा सकता। पुलिस को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह किसी आरोपी को गिरफ्तार करना चाहती है या नहीं। अदालत पुलिस को ऐसा करने या नहीं करने का निर्देश नहीं दे सकती। गिरफ्तारी के मामले में इस तरह का चुनिंदा रवैया निंदनीय है।’’
अदालत ने जांच अधिकारी से कौर की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उसने कहा कि इस मामले में शामिल आरोपियों की ‘‘चुनिंदा गिरफ्तारी’’ का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है और पुलिस उसके खिलाफ व्यावहारिक रूप से कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा कि कौर ‘‘बिना पात्रता वाली नर्स’’ है और आश्वासन दिया कि उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
न्यायमूर्ति कठपालिया ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि अब राज्य को कथित अपराध की गंभीरता का एहसास हुआ है। मेरा स्पष्ट मत है कि केवल इसलिए कि पुलिस ने किसी अज्ञात कारण से किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं करने का फैसला किया, अदालत कथित अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं कर सकती।’’
अदालत ने संबंधित पुलिस उपायुक्त को बच्ची को जल्द से जल्द बरामद कराने का निर्देश दिया और चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री से पता चलता है कि परिवार में छठी संतान रही नवजात बच्ची को मौजूदा याचिकाकर्ता ने बेच दिया था। अदालत ने कहा कि तस्वीरों में उसे उसके जैविक माता-पिता की मौजूदगी में बच्ची को लेते हुए देखा जा सकता है। अदालत ने कहा कि उसने यह भी स्वीकार किया है कि फिलहाल बच्ची उसके पास नहीं है।
अदालत ने कहा कि जब बच्ची को उसके जैविक माता-पिता, खासकर मां से अलग किया जाता है और फिर उसे दूसरे लोगों के पास भेजा जाता है तो उसके मन पर ‘‘गहरा मानसिक आघात’’ पड़ता है।
अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की भूमिका ‘‘अत्यंत चौंकाने वाली’’ है और यह उसे हिरासत से रिहा करने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।
भाषा अमित नरेश
नरेश

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