पुलिस ने अंकित हत्याकांड में ताहिर हुसैन को मृत्युदंड देने का अनुरोध किया, 31 जुलाई को आएगा फैसला

पुलिस ने अंकित हत्याकांड में ताहिर हुसैन को मृत्युदंड देने का अनुरोध किया, 31 जुलाई को आएगा फैसला

पुलिस ने अंकित हत्याकांड में ताहिर हुसैन को मृत्युदंड देने का अनुरोध किया, 31 जुलाई को आएगा फैसला
Modified Date: July 27, 2026 / 04:59 pm IST
Published Date: July 27, 2026 4:59 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने सोमवार को आसूचना ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की सनसनीखेज हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को मृत्युदंड दिए जाने का आग्रह किया। अदालत ने सजा की अवधि पर फैसला 31 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

पुलिस ने कहा कि शर्मा पर लगातार हमला करते समय दोषी ‘‘जानवरों जैसी हरकत पर उतर आए थे’’।

पांचों दोषियों की सजा को लेकर दलीलें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह के सामने रखी गईं।

विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत में कहा कि दोषियों ने शर्मा का अपहरण किया, बेरहमी से मारपीट की और उनकी हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि उनकी मौत के बाद भी वे उन पर वार करते रहे।

उन्होंने कहा, ‘‘अंकित शर्मा का अपहरण किया गया और बेरहमी से पीटकर उनकी हत्या कर दी गई। उनके शरीर पर कुल 51 घाव पाए गए, जिनमें से 18 घाव धारदार हथियारों से किए गए थे। इस्तेमाल किए गए हथियारों से इस अपराध के पीछे की मंशा और अपराधियों की क्रूरता का पता चलता है। वे जानवरों जैसी हरकत पर उतर आए थे। शर्मा की मौत के बाद भी वे उन पर हमला करते रहे।’’

पांडे ने कहा कि अपराध जघन्य और क्रूर था तथा दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।

हुसैन की ओर से पेश हुए वकील राजीव मोहन और तारा नरूला ने पुलिस के तर्क का विरोध किया और कहा कि उनके मुवक्किल की कोई खास भूमिका नहीं बताई गई है। उन्होंने कहा कि साथ ही, इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि 11 आरोपियों में से छह को इस मामले में बरी किया जा चुका है।

वकील मोहन ने कहा, ‘‘हर दोषी व्यक्ति को मौत की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए। पहले अपराध की गंभीरता बढ़ाने वाली परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए और उसके बाद सज़ा कम करने वाली परिस्थितियों पर। दोषी ठहराए जाने के मामले में, 11 आरोपियों में से छह को बरी किया जा चुका है।’’

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा के संबंध में फैसला 31 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया।

गत 13 जुलाई को अदालत ने हुसैन और चार अन्य लोगों को शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भीड़ ने शर्मा पर हमला किया था, जिनका शव बाद में एक नाले में मिला था।

भाषा नेत्रपाल नरेश

नरेश


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