नीतिगत भाषण विवाद ‘अनावश्यक और निराधार’: केरल लोक भवन

नीतिगत भाषण विवाद 'अनावश्यक और निराधार': केरल लोक भवन

नीतिगत भाषण विवाद ‘अनावश्यक और निराधार’: केरल लोक भवन
Modified Date: January 20, 2026 / 03:57 pm IST
Published Date: January 20, 2026 3:57 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 20 जनवरी (भाषा) केरल लोक भवन ने यहां कहा कि राज्य विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के नीतिगत भाषण पर मंगलवार को हुआ विवाद ‘अनावश्यक और निराधार’ है।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्यपाल पर विधानसभा में अपने संबोधन में महत्वपूर्ण हिस्सों को नहीं पढ़ने का आरोप लगाया जिसके कुछ देर बाद ही लोक भवन ने कहा कि राज्यपाल ने भाषण के मसौदे से ‘अर्ध-सत्य’ तथ्यों को हटाने का अनुरोध किया था।

उसने कहा, “सरकार ने जवाब दिया था कि राज्यपाल द्वारा उचित समझे जाने वाले संशोधनों के साथ भाषण तैयार किया जा सकता है और पढ़ा जा सकता है। यह भी संकेत दिया गया था कि सुझाए गए परिवर्तनों के साथ भाषण को दोबारा भेजा जा सकता है।”

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लोकभवन ने कहा, “ हालांकि, कल आधी रात के बाद बिना किसी संशोधन के वही भाषण राज्यपाल को वापस भेज दिया गया। राज्यपाल कोझिकोड से तिरुवनंतपुरम देर रात लौटे और उन्होंने आज सुबह विधानसभा में भाषण पढ़ा।”

लोक भवन के अनुसार, “शुरू में यह बताया गया था कि यह भाषण उनके द्वारा सुझाया गया था और सरकार ने इस पर सहमति व्यक्त की थी।”

इसने कहा है कि मसौदे में यह उल्लेख किया गया था कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था क्योंकि विधायिका द्वारा पारित विधेयकों को लंबे समय से मंजूरी नहीं मिली थी, और शीर्ष न्यायालय ने उन्हें एक संवैधानिक पीठ के पास भेज दिया था।

लोक भवन ने कहा कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि ‘उच्चतम न्यायालय ने उन्हें संवैधानिक पीठ के पास नहीं भेजा है।’

इसलिए राज्यपाल ने अनुरोध किया था कि इस संदर्भ को हटा दिया जाए।

इसके मुताबिक, उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि भाषण का वह हिस्सा हटा दिया जाए, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार का रुख आर्थिक संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

लोक भवन ने कहा कि इसके बजाय, यह सिफारिश की गई कि यह दर्ज किया जाए कि अग्रिम धनराशि से इनकार किए जाने के कारण केरल गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहा है।

इससे पहले विजयन ने कहा कि छोड़े गए अंशों में भाजपा-शासित केंद्र सरकार की राजकोषीय नीति की आलोचना करने वाले हिस्से और राजभवन में लंबित विधेयकों से संबंधित संदर्भ शामिल थे।

मुख्यमंत्री विजयन के अनुसार, राज्यपाल ने दस्तावेज के 12वें पैरा का शुरुआती हिस्सा और 15वें पैरा के अंतिम हिस्से को नहीं पढ़ा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, 157 पैरा और 72 पृष्ठों वाले नीतिगत भाषण के 16वें पैरा में राज्यपाल द्वारा एक पंक्ति जोड़ी गई।

भाषा नोमान प्रशांत

प्रशांत


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