चंपावत प्रकरण पर उत्तराखंड में सियासी घमासान, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने

चंपावत प्रकरण पर उत्तराखंड में सियासी घमासान, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने

चंपावत प्रकरण पर उत्तराखंड में सियासी घमासान, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
Modified Date: May 9, 2026 / 05:14 pm IST
Published Date: May 9, 2026 5:14 pm IST

देहरादून, नौ मई (भाषा) उत्तराखंड के चंपावत में कथित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण का पुलिस जांच में एक सुनियोजित साजिश के रूप में खुलासा होने के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अपनी आंतरिक लड़ाई में विपक्ष को घसीटने का आरोप लगाया है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा ने निराधार मामले के जरिए सरकार और संगठन की छवि खराब करने के लिए कांग्रेस से माफी मांगने को कहा है।

छह मई को चंपावत में एक व्यक्ति ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ सल्ली गांव में तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और उसे निर्वस्त्र अवस्था में रस्सियों से बांधकर एक कमरे में बंद कर दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विनोद रावत, नवीन रावत तथा भाजपा नेता पूरन सिंह रावत के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

चंपावत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विधानसभा क्षेत्र है और मामले में भाजपा नेता का नाम आने के बाद कांग्रेस ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए।

पुलिस जांच में हालांकि यह मामला झूठा निकला। पुलिस ने इसे पीड़िता का इस्तेमाल कर रची गई सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि यह नामजद आरोपियों से पुरानी रंजिश का परिणाम था।

जांच के बाद पुलिस ने पहले नामजद आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए कथित मुख्य साजिशकर्ता कमल रावत, उसकी महिला सहयोगी अर्जिता राय और एक अन्य सहयोगी आनंद सिंह महरा के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर लड़की को बंधक बनाकर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने तथा षड्यंत्र के तहत निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है। कमल रावत और अर्जिता राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

बताया जा रहा है कि कमल रावत पहले भाजपा से जुड़ा रहा है, जबकि आनंद महरा कांग्रेस से जुड़े नेता हैं और आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आनंद महरा का बचाव करते हुए कहा कि षड्यंत्र के दोनों पक्ष भाजपा से जुड़े हैं, लेकिन भाजपा कांग्रेस को इसमें घसीटने का प्रयास कर रही है।

हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “मैंने चंपावत और देहरादून के सभी समाचार पत्रों की कतरनें मंगाईं, लेकिन कहीं भी आनंद महरा की भूमिका षड्यंत्रकर्ता के रूप में दिखाई नहीं दी।”

उन्होंने कहा कि महरा का अपराध केवल इतना है कि कमल रावत से घटना की जानकारी मिलने पर वह थाने पहुंचा और पुलिस से पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का आग्रह किया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अन्य युवाओं की तरह महरा ने भी फेसबुक लाइव और रील बनाकर मामले को उठाया, लेकिन ऐसा तो सैकड़ों लोगों ने किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला लगभग 24 घंटे तक सामूहिक दुष्कर्म के रूप में बना रहा।

उन्होंने कहा, “यदि किसी कांग्रेस नेता की संलिप्तता है तो उसका प्रमाण सहित खुलासा किया जाना चाहिए। संदेशवाहक को निशाना बनाना सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। भाजपा अपने आंतरिक विवाद में कांग्रेस को घसीटने की कोशिश कर रही है।”

उन्होंने भाजपा नेताओं को चेताते हुए कहा, “चंपावत न्याय के देवता गोलज्यू की धरती है।”

वहीं, प्रदेश भाजपा महामंत्री दीप्ति रावत ने कहा कि चंपावत प्रकरण एक सुनियोजित साजिश थी, लेकिन कांग्रेस ने निराधार घटना की आड़ में भाजपा संगठन और राज्य सरकार की छवि खराब करने का प्रयास किया।

दीप्ति ने कहा, “कांग्रेस इस मामले में गैर-जिम्मेदाराना, असंवेदनशील और शर्मनाक व्यवहार कर रही है। पुलिस जांच में साजिश की बात सामने आने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और अन्य नेता भाजपा तथा सरकार को बदनाम करने में लगे हैं।”

भाजपा नेता ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम में जिस व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है, वह कांग्रेस नेता आनंद महरा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महरा लगातार अपने बयान बदल रहे हैं और पीड़ित लड़की पर ही आरोप लगा रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि चुनाव लड़ने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते यह षड्यंत्र रचा गया।

दीप्ति ने कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा से आग्रह किया कि वह एक महिला होने के नाते इस मुद्दे पर संज्ञान लें और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल से माफी मंगवाएं।

भाषा

दीप्ति रवि कांत


लेखक के बारे में