लद्दाख में नायब तहसीलदारों को आरक्षित श्रेणी और आय प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार

लद्दाख में नायब तहसीलदारों को आरक्षित श्रेणी और आय प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार

लद्दाख में नायब तहसीलदारों को आरक्षित श्रेणी और आय प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार
Modified Date: September 19, 2026 / 04:52 pm IST
Published Date: September 19, 2026 4:52 pm IST

लेह/जम्मू, 19 सितंबर (भाषा) लद्दाख के दूरदराज इलाकों में लोगों को जरूरी सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को स्वतंत्र प्रभार वाले नायब तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आरक्षित श्रेणी और आय संबंधी प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार दिया।

लोक भवन के एक प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के राजस्व विभाग ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 13 के प्रावधान के तहत अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के तहत नामित नायब तहसीलदारों को अपने संबंधित क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में आरक्षित श्रेणी प्रमाणपत्र और आय प्रमाण-पत्र जारी करने की शक्तियां प्रदान की गई हैं।

उन्होंने बताया कि अधिसूचना में विशेष रूप से उन नायब तहसीलदारों को यह अधिकार दिया गया है, जो किसी तहसील का स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे हैं और प्रथम श्रेणी सहायक कलेक्टर की शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि संबंधित नायब तहसीलदार ये शक्तियां अपने-अपने स्थानीय क्षेत्र और अधिकार क्षेत्र के भीतर ही इस्तेमाल करेंगे।

उपराज्यपाल ने कहा, “लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेश में, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरियों के कारण सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, यह हमारी जिम्मेदारी है कि शासन को लोगों के और करीब लाया जाए।

स्थानीय स्तर पर राजस्व अधिकारियों को इन प्रमाण-पत्रों को जारी करने का अधिकार देकर हम एक महत्वपूर्ण नागरिक सेवा को अधिक सुलभ बना रहे हैं और नियमित प्रशासनिक जरूरतों के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम कर रहे हैं।”

प्रवक्ता ने बताया कि इस फैसले का उद्देश्य विशेष रूप से दूरदराज और सुदूर इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानियों को कम करना है।

उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, लाभों, आरक्षण और अन्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी प्रमाण-पत्र हासिल करने के वास्ते लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश


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