प्रकाश चिक बराइक ने तृणमूल कांग्रेस एवं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया

प्रकाश चिक बराइक ने तृणमूल कांग्रेस एवं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया

प्रकाश चिक बराइक ने तृणमूल कांग्रेस एवं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया
Modified Date: June 11, 2026 / 04:04 pm IST
Published Date: June 11, 2026 4:04 pm IST

नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बराइक ने बृहस्पतिवार को उच्च सदन की सदस्यता के साथ-साथ पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा भाजपा को दिए गए जनादेश को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है।

सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के बाद, इस हफ़्ते पार्टी छोड़ने वाले बराइक तीसरे टीएमसी सांसद हैं।

सूत्रों के मुताबिक, बराइक ने राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन से मुलाक़ात की और अपना इस्तीफ़ा सौंपा।

राज्यसभा सचिवालय की एक अधिसूचना में कहा गया कि सभापति ने इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है।

बाद में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता निशिकांत दुबे के आवास के बाहर पत्रकारों से बातचीत में बराइक ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा के पक्ष में जनादेश दिया है। तृणमूल कांग्रेस को जनता का समर्थन नहीं मिला। पश्चिम बंगाल के लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हुए मैं पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं।’’

अपने इस्तीफे में पश्चिम बंगाल से सांसद बराइक ने लिखा, ‘‘मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं। कृपया मेरा इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की कृपा करें।’’

उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए राज्यसभा के सभापति, उपसभापति तथा राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया।

पश्चिम बंगाल के आदिवासी नेता बराइक, संसद की उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण संबंधी स्थायी समिति तथा जनजातीय मामलों की परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में कार्यरत रहे।

उनका इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस से नेताओं के लगातार हो रहे पलायन के बीच आया है।

सोमवार को राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के अपने फैसले की भी घोषणा की थी।

बुधवार को राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने भी संसद की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने नयी दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की, जिससे उनके भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

बराइक के इस्तीफे के साथ ही तृणमूल कांग्रेस इस सप्ताह अपने तीन राज्यसभा सदस्यों को खो चुकी है। इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस संकट का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर बगावत की स्थिति भी पैदा हो गई है, जिससे उसकी संगठनात्मक और विधायी ताकत काफी कमजोर हुई है।

पिछले सप्ताह पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक (80 में से 58) आधिकारिक विधायक दल से अलग हो गए। इसके बाद पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता मिल गई।

विद्रोही गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और भी बढ़ गई है।

बाद में, यह संकट संसद तक भी पहुंच गया। लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी सांसदों ने दावा किया कि उन्हें लोकसभा के 20 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

बुधवार को यादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय भी बागी सांसदों के गुट में शामिल हो गईं।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


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