दार्जिलिंग, 12 जनवरी (भाषा) रियलिटी शो में जीत के बाद कोलकाता पुलिस के सिपाही से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले गायक-अभिनेता प्रशांत तमांग का पार्थिव शरीर सोमवार को दार्जिलिंग स्थित उनके आवास लाया गया और इस दौरान पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल रहा।
तमांग की आवाज और संघर्ष की कहानी ने न केवल देशवासियों का दिल जीता, बल्कि दार्जिलिंग की पहाड़ियों की राजनीतिक चेतना को भी नयी दिशा दी।
‘इंडियन आइडल’ सीजन-3 के विजेता प्रशांत तमांग का रविवार को दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वह 43 वर्ष के थे।
अधिकारियों ने बताया कि गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) के निर्देश पर उनका अंतिम संस्कार दार्जिलिंग में पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा।
जीटीए के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के सहायक निदेशक बी.के. घीसिंग ने तमांग के निधन को दार्जिलिंग की पहाड़ियों के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि सोमवार को दार्जिलिंग में उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद शोक सभा और सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन होगा।
उन्होंने बताया कि तमांग को श्रद्धांजलि देने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों के कलाकारों, राजनीतिक नेताओं और बड़ी संख्या में आम लोगों के पहुंचने की संभावना है।
घीसिंग ने कहा, “वह सिर्फ एक गायक नहीं थे, बल्कि दार्जिलिंग की आवाज और पहचान थे।”
तमांग की संगीतमय सफलता ने जहां पूरे देश की कल्पना को बांध लिया, वहीं वर्ष 2007 में ‘इंडियन आइडल’ में उनकी जीत ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास पर अमिट छाप छोड़ी।
दार्जिलिंग और उसके बाहर से मिले लाखों वोटों के अभूतपूर्व जनसमर्थन के बल पर खिताब जीतकर तमांग, क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक हलचल के दौर में गोरखा गौरव और आकांक्षा के एक सशक्त प्रतीक के रूप में उभरे।
राष्ट्रीय मंच पर एक स्थानीय युवक के समर्थन से शुरू हुआ यह सांस्कृतिक अभियान जल्द ही राजनीतिक क्षेत्र में फैल गया। प्रतियोगिता के दौरान हुई व्यापक जनभागीदारी ने ऐसा जमीनी नेटवर्क तैयार किया, जो टीवी कार्यक्रम की सीमाओं से आगे निकल गया और राजनीतिक संगठन का आधार बन गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘इंडियन आइडल’ के दौरान प्रशांत तमांग को मिला यह जनसमर्थन पहाड़ी राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस अभियान के दौरान बने सांस्कृतिक नेटवर्क और प्रशंसक समूह धीरे-धीरे संगठित राजनीतिक इकाइयों में बदलते चले गए।
प्रशांत तमांग के समर्थन में जनमत जुटाने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले बिमल गुरुंग ने इस उभरती जनभावना को कुशलतापूर्वक एक राजनीतिक शक्ति में ढाल दिया। यही जोश अनुभवी नेता और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) प्रमुख सुभाष घीसिंग को सत्ता के केंद्र से हटाने का कारण बना और दार्जिलिंग में एक नयी राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत हुई।
जीत के बाद भी पहाड़ियों में भावनाएं उफान पर रहीं, खासकर दिल्ली स्थित एक रेडियो जॉकी की चलते कार्यक्रम में कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान।
इस अशांति ने पहचान और मान्यता को लेकर पहले से सुलग रही भावनाओं को और गहरा किया तथा लंबे समय से चली आ रही अलग गोरखालैंड की मांग को नयी गति दी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दार्जिलिंग सांसद राजू बिष्ट ने तमांग के निधन को पूरे देश के लिए एक बड़ा सदमा बताया।
बिष्ट ने पत्रकारों से कहा, “पुलिस कांस्टेबल के रूप में सेवा करने और स्थानीय ऑर्केस्ट्रा में गाने से लेकर ‘इंडियन आइडल’ जीतने तक, प्रशांत तमांग ने यह दिखाया कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास से किस्मत बदली जा सकती है। उन्होंने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया और गोरखा पहचान को राष्ट्रीय चेतना में स्थान दिलाया।”
दार्जिलिंग से भाजपा विधायक नीरज जिम्बा ने कहा कि प्रशांत तमांग की यात्रा ने राजनीतिक और सामाजिक विभाजनों से ऊपर उठकर लोगों को एकजुट किया।
उन्होंने कहा, “उनका उदय वह क्षण था जब दार्जिलिंग की पहाड़ियों ने एक स्वर में अपनी बात कही। यह विरासत लंबे समय तक कायम रहेगी।”
जैसे-जैसे दार्जिलिंग अपने चहेते नायक को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा है, यहां के लोग कहते हैं कि प्रशांत तमांग को केवल ‘इंडियन आइडल’ के विजेता या सफल अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत के रूप में याद किया जाएगा, जिनकी आवाज ने पहाड़ियों में पहचान, आकांक्षा और राजनीति की परिभाषा ही बदल दी।
भाषा खारी नेत्रपाल मनीषा
मनीषा