President Droupadi Murmu Bengal Visit : पश्चिम बंगाल में देश की राष्ट्रपति का अपमान,भड़के एमपी और छत्तीसगढ़ के सीएम, सोशल मीडिया पर कह दी बड़ी बात
पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत के लिए राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद नहीं होने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति ने आयोजन स्थल को लेकर नाराज़गी जताई, वहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
President Droupadi Murmu Bengal Visit / Image SOURCE : X
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पश्चिम बंगाल पहुंचीं।
- कार्यक्रम में स्वागत के लिए राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद नहीं होने पर विवाद खड़ा हो गया।
- एमपी के सीएम मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
नई दिल्ली: Droupadi Murmu West Bengal Tour News राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल पहुंची। यह कॉन्फ्रेंस सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में आयोजित किया गया था। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद वहां नहीं था।
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम के बाद कॉन्फ्रेंस के लिए तय किए गए स्थल को लेकर अपनी नाराज़गी जाहिर की और इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कटाक्ष किया। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय का बयान सामने आया है।
सीएम डॉ.मोहन यादव ने दिया यह बयान
सीएम डॉ मोहन ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर पोस्ट करते हुए कहा की राष्ट्रपति पद राजनीति से ऊपर है। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के साथ हुआ व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। मैं इसकी कठोर शब्दों में निंदा करता हूं।मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को माफी मांगना चाहिए।
सत्ता के अहंकार में डूब चुकीं है मुख्यमंत्री
सीएम विष्णु देव साय ने भी इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा की आदिवासी समाज की बेटी और देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का अपमान केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता का अपमान है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटबैंक की राजनीति और तुष्टिकरण में लिप्त तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सत्ता के अहंकार में इतने डूब चुके हैं कि उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का भी ख्याल नहीं रहा।
पूरे देश और आदिवासी समाज से मांगनी चाहिए माफी
यह न केवल शर्मनाक है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुला अपमान है।राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से कहीं ऊपर है। देश की प्रथम नागरिक के प्रति इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र की बुनियादी परंपराओं पर गहरा आघात है।तृणमूल कांग्रेस को इस घोर आपत्तिजनक कृत्य के लिए पूरे देश और आदिवासी समाज से तत्काल माफी मांगनी चाहिए।
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