नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सिविल सेवा दिवस पर लोक सेवकों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सत्यनिष्ठा एवं संवेदनशीलता अंतर पाटने, समावेशिता को बढ़ावा देने और राज्य एवं नागरिकों के बीच भरोसा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर लोक सेवकों से कहा कि ‘‘नवोन्मेषी, भविष्योन्मुखी और नागरिक-केंद्रित नीतियों के निर्माण से लेकर जमीनी स्तर पर उनके प्रभावी कार्यान्वयन तक आपका काम करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब भारत नयी आकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है, तब आपकी सत्यनिष्ठा एवं संवेदनशीलता के अंतर को पाटने, समावेशिता को बढ़ावा देने और राज्य एवं उसके नागरिकों के बीच भरोसा मजबूत करने में अहम होगी।’’
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आप लोक सेवा के सर्वोच्च मानदंडों को बनाए रखें और अधिक न्यायपूर्ण एवं प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में सार्थक योगदान देते रहें।’’
राधाकृष्णन ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘सिविल सेवा दिवस के अवसर पर मैं सभी लोक सेवकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और राष्ट्र के प्रति आपकी निष्ठा तथा अनुकरणीय सेवा की हार्दिक प्रशंसा करता हूं।’’
उन्होंने कहा कि इस वर्ष की विषयवस्तु ‘विकसित भारत : नागरिक केंद्रित शासन और अंतिम छोर तक विकास’ है जो ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है तथा यह पारदर्शी, जवाबदेह एवं नागरिक केंद्रित शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिसमें अंतिम छोर पर मौजूद व्यक्ति तक भी सेवाएं पहुंचाने और समावेशी विकास पर विशेष जोर है।
उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हम सभी इस दिन को मनाएं और समावेशी एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक रूप से काम करना जारी रखें।’’
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि भारत की प्रशासनिक व्यवस्था के स्थायी स्तंभ के रूप में शासन को मजबूत करने और जनसेवाएं पहुंचाने में लोक सेवकों के प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उपराष्ट्रपति मंगलवार को यहां विज्ञान भवन में आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह में मुख्य भाषण देंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जमीनी स्तर से लेकर नीतियां बनाने तक सेवकों के प्रयास अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं और भारत की प्रगति में योगदान देते हैं।
उन्होंने सभी लोक सेवकों को सिविल सेवा दिवस की बधाई देते हुए कहा कि यह सुशासन एवं राष्ट्र निर्माण के लिए काम करने के संकल्प को और मजबूत करने का अवसर है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोक सेवक उत्कृष्टता, संवेदनशीलता और नवोन्मेष के साथ सेवा करते रहें तथा कर्तव्य के सर्वोच्च मानदंडों को बनाए रखें।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र सेवा ही ‘विकसित भारत’ की नींव है।
उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हम सिविल सेवा दिवस के गौरवशाली अवसर पर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर सशक्त, समृद्ध एवं संवेदनशील भारतवर्ष के निर्माण का संकल्प दोहराएं।’’
केंद्र सरकार हर साल 21 अप्रैल को ‘सिविल सेवा दिवस’ के रूप में मनाती है। इस दिन लोक सेवक नागरिकों के हित के प्रति समर्पण और सार्वजनिक सेवा एवं कार्य में उत्कृष्टता को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराते हैं।
यह तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में इसी दिन दिल्ली में प्रशासनिक सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित किया था और लोक सेवकों को भारत का ‘इस्पात ढांचा’ कहा था।
भाषा सिम्मी वैभव
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