नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बृहस्पतिवार को कहा कि निजी स्कूलों को अब किसी भी प्रस्तावित शुल्क वृद्धि को 18 निर्धारित मानकों के आधार पर उचित ठहराना होगा और अभिभावकों को संतुष्ट करना होगा कि शुल्क बढ़ोतरी वाजिब है।
मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 15 जुलाई तक दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के तहत स्कूल स्तर पर शुल्क विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) का गठन करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अनुपालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सूद ने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किफायती और सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ‘‘समाज के लिए एक पवित्र सेवा है, न कि कोई व्यावसायिक उद्यम’’ है।
उन्होंने कहा कि नए ढांचे के तहत, शुल्क संशोधन चाहने वाले स्कूलों को अपना प्रस्ताव समिति के समक्ष रखना होगा और नियमों के तहत निर्धारित 18 मानकों के आधार पर प्रस्तावित वृद्धि को उचित ठहराना होगा।
मंत्री ने कहा, ‘‘इन मानकों में बुनियादी ढांचे का विकास, परिवहन सुविधाएं, स्कूल भवन, सुरक्षा उपाय, प्रकाश व्यवस्था, कर्मचारियों की भर्ती और अन्य संस्थागत आवश्यकताओं पर होने वाला खर्च शामिल है। स्कूलों को यह दिखाना होगा कि प्रस्तावित शुल्क वृद्धि वास्तविक सुधारों से जुड़ी है और उसके समर्थन में उनके पास वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।’’
एक बयान के अनुसार, प्रत्येक निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल को एक एसएलएफआरसी का गठन करना अनिवार्य होगा, जिसमें छात्रों के अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। पांच अभिभावक प्रतिनिधियों और तीन शिक्षक प्रतिनिधियों का चयन, सात दिन की अनिवार्य सार्वजनिक सूचना देने के बाद, लॉटरी निकालकर किया जाएगा।
यह प्रक्रिया सार्वजनिक होगी और इसकी वीडियो-रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसकी निगरानी सरकार द्वारा नियुक्त एक पर्यवेक्षक करेगा।
बयान में यह भी कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के अनुपालन में, निजी स्कूल अपनी संशोधित शुल्क संरचनाओं की नियामक समितियों द्वारा जांच और अनुमोदन होने तक 2025-26 शैक्षणिक सत्र की दरों पर ही शुल्क लेंगे।
भाषा आशीष पवनेश
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