गैर-कोयला खनन परियोजनाओं की पर्यावरण मंजूरी के लिये भूमि अधिग्रहण का प्रमाण देना अब अनिवार्य नहीं
गैर-कोयला खनन परियोजनाओं की पर्यावरण मंजूरी के लिये भूमि अधिग्रहण का प्रमाण देना अब अनिवार्य नहीं
नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय के हालिया ज्ञापन के अनुसार, गैर-कोयला खनन परियोजना के विकासकर्ताओं को अब पर्यावरण मंजूरी के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।
अब तक, मंत्रालय को भूमि अधिग्रहण का प्रमाण चाहिए होता था।
इस नियम पर हालांकि पुनर्विचार किया गया क्योंकि यह अनुरोध किया गया था कि गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्रदान करते समय भूस्वामियों की सहमति पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण की स्थिति को मंजूरी प्रदान करने से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
मंत्रालय के एक आधिकारिक ज्ञापन में कहा गया, “मामले को गैर-कोयला खनन विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) के विचारार्थ भेजा गया था। विचार-विमर्श के बाद क्षेत्रीय ईएसी ने पाया कि गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए ईसी प्रदान करते समय भूस्वामियों से सहमति को अलग करने का अनुरोध उचित प्रतीत होता है और इसे स्वीकार किया जा सकता है।”
इसमें कहा गया, “इसके अलावा, ईएसी ने अन्य बातों के साथ-साथ यह भी पाया कि कई खनन परियोजनाएं ऐसी हैं जहां ईसी मिलने के बाद खनन कार्य शुरू हो चुका है और आवश्यकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से भूमि अधिग्रहण अब भी जारी है।”
आदेश में कहा गया, “गैर-कोयला खनन ईएसी की सिफारिशों की जांच की गई और 7 अक्टूबर 2014 के ओएम (कार्यालय ज्ञापन) की, संशोधित रूप में, अन्य क्षेत्रों पर प्रयोज्यता के संबंध में टिप्पणियां और सुझाव भी मांगे गए। प्राप्त जानकारी के आधार पर यह पाया गया कि ईसी के मूल्यांकन के समय भूमि अधिग्रहण दस्तावेजों पर जोर देना कुछ अन्य परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक नहीं हो सकता है।”
भाषा प्रशांत पवनेश
पवनेश

Facebook


