नागरिक संस्थाओं के लिए एक साधन है प्रदर्शन : उच्चतम न्यायालय

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नागरिक संस्थाओं के लिए एक साधन है प्रदर्शन : उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - November 10, 2022 / 12:59 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 09:01 PM IST

नयी दिल्ली, नौ नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जिस तरह कर्मचारियों के लिए हड़ताल एक हथियार है, उसी तरह विरोध प्रदर्शन करना नागरिक संस्थाओं के लिए एक ‘‘साधन’’ है।

उच्चतम न्यायालय ने रवि नंबूथिरी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें नवंबर 2015 में रवि के पार्षद चुने जाने को रद्द करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था।

पद के लिए उनका चुनाव इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि उन्होंने अपने नामांकन में एक आपराधिक मामले में अपनी संलिप्तता को छिपाया था और इस तरह उन्होंने एक भ्रष्ट आचरण किया।

न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, ‘‘जिस तरह हड़ताल श्रमिकों का और तालाबंदी नियोक्ता के हाथ में एक हथियार की तरह है, उसी तरह विरोध प्रदर्शन नागरिक संस्थाओं के लिए एक साधन है।’’

पुलिस की शिकायत के मुताबिक, 20 सितंबर, 2006 को नंबूथिरी और अन्य गैरकानूनी रूप से एकत्र हुए और अन्नामनदा ग्राम पंचायत के कार्यालय परिसर में धरना आयोजित करने के लिए एक अस्थायी पांडाल लगाया।

भाषा

शफीक प्रशांत

प्रशांत