(पूनम मेहरा)
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) उनके शानदार प्रदर्शन ने भारतीय मुक्केबाजी को बहुत ऊंचे मुकाम पर पहुंचाया लेकिन विजेंदर सिंह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि देश के पुरुष मुक्केबाजों का भविष्य क्या होगा जिन्हें ‘जी-हुजूरी’ को बढ़ावा देने वाली चयन प्रणाली से निपटने के दौरान ‘पर्याप्त मुकाबले नहीं मिल रहे हैं’।
मुक्केबाजी में भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता, लगातार तीन राष्ट्रमंडल खेलों में पदक और एशियाई खेलों में दो पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में यह भी कहा कि इस समय महिला मुक्केबाज पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और 2028 ओलंपिक में उनसे पदक जीतने की बेहतर उम्मीदें हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों की टीम में पदक की दो मजबूत दावेदारों का जिक्र करते हुए विजेंदर ने कहा, ‘‘चाहे वह साक्षी (चौधरी) हों या प्रीति (पवार), वे बहुत अच्छा कर रही हैं और वे अच्छी फॉर्म में हैं। लड़के भी अच्छा कर रहे हैं लेकिन कुल मिलाकर मैं कह सकता हूं कि लड़कियां राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छा करेंगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खेलों में यह मुश्किल होने वाला है, विशेषकर पुरुषों के लिए। पर हमारी लड़कियां जीत जाएंगी, लड़कियों से मुझे बहुत उम्मीदें हैं।’’
विजेंदर ने कहा, ‘‘ओलंपिक में भी लड़कियां पदक लेकर आएंगी।’’
हालांकि मुक्केबाजों के बारे में उनके विचार अधिकतर सकारात्मक थे लेकिन उन्होंने खेल के मौजूदा प्रबंधन, विशेषकर राष्ट्रीय शिविर में ग्रेडिंग प्रणाली की कड़ी आलोचना की जिसके तहत मुक्केबाजों को ट्रेनिंग प्रदर्शन के ओवरऑल विश्लेषण को ध्यान में रखकर चुना जाता है।
इसने पहले की ट्रायल आधार प्रणाली की जगह ली है जिसमें बड़ी प्रतियोगिताओं की टीम चुनने के लिए मुकाबले होते थे। हालांकि हाल ही में भारतीय खेल प्राधिकरण के चयन प्रक्रिया में अस्प्ष्टता का हवाला देते हुए शिविर की अनुमति वापस लेने के बाद भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए चयन ट्रायल कराने पड़े।
विजेंदर ने कहा, ‘‘(शिविर में) वरीयता प्रणाली (मुक्केबाजी के लिए) सबसे बुरी चीज है जो हो सकती है। यह खा जाएगा भारतीय मुक्केबाजी को, मेरी बात याद रखना। मैं यह उन सभी से साफ-साफ कहता हूं जो सुनना चाहेंगे, लेकिन वे सिर्फ सुनते हैं और कुछ नहीं करते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हर प्रतियोगिता से पहले ट्रायल होने चाहिए। यह कहना बकवास है कि हम मुक्केबाजों को ग्रेड देंगे, उन्हें अंक देंगे। चीजें ऐसे नहीं चलतीं।’’
विजेंदर ने कहा, ‘‘मुक्केबाज की रिंग के अंदर परीक्षा होनी चाहिए, ट्रायल्स देने चाहिए और अगर वह जीतता है तो उसे चुन लिया जाना चाहिए। पुरानी प्रणाली ठीक थी। ग्रेड प्रणाली में तो फिर जी हुजूरी होती रहेगी, पहले अगर ऐसा होता तो हम भी शायद बस हाथ जोड़ते।’’
भाषा सुधीर नमिता
नमिता