कथित 1500 करोड़ बैंक धोखाधड़ी की न्यायालय की निगरानी में जांच को लेकर जनहित याचिका दायर

कथित 1500 करोड़ बैंक धोखाधड़ी की न्यायालय की निगरानी में जांच को लेकर जनहित याचिका दायर

कथित 1500 करोड़ बैंक धोखाधड़ी की न्यायालय की निगरानी में जांच को लेकर जनहित याचिका दायर
Modified Date: June 8, 2026 / 04:25 pm IST
Published Date: June 8, 2026 4:25 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय में सोमवार को एक जनहित याचिका दायर की गई जिसमें संपत्ति पुनगर्ठन कंपनियों (एआरसी), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और नोएडा स्थित एक बुनियादी ढांचा फर्म से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी की अदालत की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध किया गया।

इस जनहित याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह ‘‘भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों सहित एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति का गठन करे, जो एआरसी के जरिये कथित कॉर्पोरेट और बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच करे’’।

अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय और अश्वनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल याचिका में, वैकल्पिक प्रार्थना के रूप में, ईडी, एसएफआईओ और सीबीआई को बुनियादी ढांचा फर्म और एआरसी के मामलों में अर्न्स्ट एंड यंग की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में पहचाने गए संदिग्ध लेनदेन की जांच करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

जनहित याचिका के अनुसार, बुनियादी ढांचा निर्माण कंपनी ने 2012 और 2015 के बीच भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले सात बैंकों के एक समूह से लगभग 912 करोड़ रुपये के ऋण प्राप्त किए थे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2018 में किए गए एक फोरेंसिक ऑडिट में 902 करोड़ रुपये से अधिक की रकम मुखौटा कंपनियों, गैर-मौजूद विक्रेताओं, अघोषित बैंक खातों और संदिग्ध धोखाधड़ी वाले लेनदेन के माध्यम से गबन किये जाने का संकेत मिला है।

मुजफ्फरनगर की रहने वाली प्रतीक्षा और दो अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका में कथित बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

भाषा धीरज मनीषा

मनीषा


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